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संडे स्पेशल :बुद्ध अनुराईयों के लिए बरेली बनेगा तीर्थ स्थल , थाईलैंड से आई करोड़ो की लागत की बुद्ध प्रतिमा,

अनुज सक्सेना,

बरेली। यूपी के बरेली शहर को जल्द नई पहचान मिलने वाली है। अब तक बरेली को नाथ नगरी के साथ आलाहजरत के शहर के रूप में जाना जाता है । अब यह शहर बुद्ध के मानने वालों के तीर्थ स्थल के रूप में विशेष स्थान होगा । बारादरी थाना क्षेत्र के चंद्रमणि बुद्ध बिहार में बुद्ध के अनुराईयों ने एमपी के महू – में बने बुद्ध विहार के तर्ज पर बुद्ध विहार का निर्माण किया जा रहा है। जानकार बताते है कि एमपी के महू में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के पिता अंग्रेजी सेना में सूबेदार थे । और इसी स्थान पर डॉक्टर अम्बेडकर का जन्म भी हुआ था बाद में डॉक्टर अम्बेडकर ने भी इसी स्थान पर बुद्ध दीक्षा ली थी । यही कारण है इस स्थान का बुद्ध अनुराईयों के लिए विशेष महत्व होता है।

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बुद्ध के अनुराईयों ने जनसहयोग से बनाई भव्य इमारत

बरेली के संजय नगर में स्थित चंद्रमणि बुद्ध विहार का निमार्ण का काफी समय से हो रहा है। जल्द इसके निर्माण के पूरे होने की उम्मीद है। हालांकि इस बुद्धविहार के निर्माण के वक्त से बुद्ध के मानने वाले चाहते थे कि वह अपने शहर में कुछ ऐसा निर्माण कराये जो नई पीढ़ी को गौतम बुद्ध के जीवन के साथ संविधान शिल्पी बाबा साहब के जीवन के बारे में जान सके।

 

 

थाईलैंड से आई बुद्ध की प्रतिमा

संजय नगर के बुद्ध विहार में तथागत बुद्ध की प्रतिमा बरेली पहुंच चुकी है, जल्द यह करोड़ो की लागत से बनने वाले बुद्ध विहार में यह मूर्ति जल्द लगा भी दी जाएगी। इस बुद्ध विहार का निर्माण में खास तौर पर बुद्ध अनुराईयों के साथ राजनीतिक लोगों का भी सहयोग रहा है।

महू में स्थित भीम जन्मस्थान का एक फोटो

गगन मालिक ने भेजी बुद्ध की प्रतिमा

फिल्म एवं टीवी कलाकार गगन मालिक ने बरेली के बुद्ध अनुराईयों के लिए बुद्ध प्रतिमा थाईलैंड से बरेली के लिए भिजवाई है। गगन के मालिक के बारे में कहा जाता है कि वह नाटकों व फिल्मों में अभिनय करते करते बुद्ध की विचारधारा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने देश के कई हिस्सों में बुद्ध की प्रतिमाओं को दान किया।

चंद्रमणि बुद्ध विहार से जुड़े टी दास बताते है कि बुद्ध विहार में जल्द बुद्ध की प्रतिमा लगाई जाएगी , इस प्रतिमा के लगाने का साफ यह संदेश है कि लोगों तक बुद्ध के संदेश पहुंच सके और लोगों के जीवन में बुद्ध की शिक्षा से परिवर्तन आए।

 

 

जशवंत अंबेडकर ने बताया कि बरेली के बुद्ध अनुराईयों की इच्छा थी कि बरेली में कुछ नया करा जाए जिसके चलते बरेली के चंद्रमणि बुद्ध विहार में एमपी के महू की दर्ज पर नई बिल्डिंग का निर्माण का फैसला लिया गया। यह बिल्डिंग एमपी में बनी दीक्षा स्थल की बुद्ध अनुराईयों को याद दिलाती रहेगी और लोग इस स्थान से यह भी जान सकेंगे आखिर बुद्ध को पूरी दुनिया में लाइट ऑफ एशिया क्यों कहा जाता है।

 

बौद्ध भिक्षु दीपांकर बरेली में बन रही अंबेडकर जन्मस्थली के बारे में जानकारी देते हुए,

 

 

शहर के मुख्य द्वार पर लगे बुद्ध या अंबेडकर की प्रतिमा

बरेली के बुद्ध अनुराईयों का मानना है कि जिस तरह शहर के मुख्य द्वारों एवं चौराहों के नाम देवी देवताओं एंव उनके प्रतीक चिन्हों को ध्यान में रखकर निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे में उनकी भी मांग है कि शहर के किसी भी चौराहे या द्वार का नाम बाबा भीमराव अंबेडकर या तथागत बुद्ध के नाम पर रखा जाए । इससे समाज में एक स्वस्थ्य संदेश जाएगा।

बुद्धविहार के बौद्ध  भिक्षु दीपांकर उर्फ भोला ने बताया कि बरेली के बुद्ध विहार में निर्माण हो रही बिल्डिंग पूरे हिंदुस्तान में महू के तर्ज पर बनने वाली दूसरी इमारत है। यह बिल्डिंग बौद्ध धर्म के मानने वालों के सहयोग से बनाई जा रही है।

 

 

 

 संविधान निर्माता डॉक्टर अंबेडकर की जन्मभूमि है एमपी का महू 

एमपी का महू भीमराव अम्बेडकर की जन्मस्थली है। इस जगह को एमपी में महू में स्थित इस स्थल को अम्बेडकर नगर के रूप में जाना जाता है।अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को एक सैन्य छावनी महू के काली पलटन इलाके में हुआ था। यहां मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी जन्मस्थली पर एक भव्य स्मारक बनाया है, जिसे ‘भीम जन्मभूमि’ नाम दिया गया है।

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