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राखी स्पेशल : बहने पूरे दिन बांध सकेंगी भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र – 22 अगस्त को मनाया जाएगा पर्व, शुभ फल देने वाले रहेंगे ग्रह योग

इस बार भद्रा रहित शोभन और राजयोग में रक्षाबंधन

ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा

बरेली। श्रावण मास की पूर्णिमा 22 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व है। इस बार कई विशेष योग रहेंगे। धनिष्ठा नक्षत्र के साथ राजयोग और शोभन योग रहेगा। अर्थात उदयकाल में भद्रा नहीं होने से पूरे दिन भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा सकेंगी।

रक्षा बंधन के त्यौहार पर सुबह से शाम 5:32 तक राजयोग, सुबह 10:34 बजे तक शोभन योग और रात 7:40 तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा। इसमें परा व्यापनी तिथि ली जाती है। यदि वह दो दिन हो, या दोनों दिन न हो तो पूर्वा लेनी चाहिए। यदि इसमें भद्रा आ जाए तो उसका त्याग किया जाता है। भद्रा में श्रावणी और फाल्गुनी दोनों वर्जित है। श्रावणी में राजा और फाल्गुनी में प्रजा का नाश होता है। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा है ही नहीं। भद्रा सुबह 5:38 बजे तक ही खत्म हो जाएगा। पंचक रहेगा लेकिन इस बार पंचक होना कोई बाधा नहीं है।

राज योग: राजयोग में किया गया शुभ कार्य मंगलकारी रहता है। इस विशेष योग में रक्षाबंधन करना सभी भाई बहनों के लिए सिध्दायक रहेगा।

शोभन योग: शोभन योग को शुभ कार्यों और यात्रा पर जाने के लिए अति उत्तम कहा गया है। इस योग में शुरू की गई यात्रा अत्यंत सुखद ब मंगलकारी होती है।

धनिष्ठा नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। मान्यता है कि धनिष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाला भाई अपने बहन के प्रति विशेष लगाव रखता है।

पूर्णिमा तिथि: 21 अगस्त शाम 7:01 बजे से 22 अगस्त शाम 5:32 बजे तकशुभ मुहूर्त: सुबह 7:22 बजे से पूरे दिनराहु काल: सुबह 5:05 बजे से सुबह 6:43 बजे तक

इस तरह करें पूजनव्रत करने वाले सुबह स्नान के बाद देवता ऋषि एवं पितरों का तर्पण करें। दोपहर के बाद ऊनी, सूती, रेशमी पीला वस्त्र लेकर उसमें सरसों, केसर, चंदन, चावल, दूर्वा रखकर बांध लें। एक कलश की स्थापना कर उस पर रक्षा सूत्र को रख विधिवत पूजन करें। इसके बाद रक्षा सूत्र दाहिने हाथ में बंधवा लें। यह रक्षा सूत्र एक वर्ष पर्यंत रक्षा करता है। सफेद व पीले धागे से बने रक्षा सूत्र का उपयोग किया जाना चाहिए।

रक्षा सूत्र का वैज्ञानिक महत्वरक्षासूत्र में रेशम मुख्य अवयय है। रेशम को कीटाणुओं को नष्ट करने वाला यानि प्रति जैविक माना जाता है, जिसे एंटीबायोटिक कहते हैं। केसर को ओजकारक, उष्णवीर्य, उत्तेजक, पाचक, वात-कफ-नाशक और दर्द को नष्ट करने वाला माना गया है। लिहाजा रक्षाबंधन के रक्षा सूत्र में केसर भाई के ओज और तेज में वृद्धि का, अक्षत भाई के अक्षत, स्वस्थ और विजयी रहने की कामना का, सरसों के दाने भाई के बल में वृद्धि का, दूर्वा भ्राता के सदगुणों में बढ़ोत्तरी का, और चंदन भाई के जीवन में आनन्द, सुगंध और शीतलता में वृद्धि का प्रतीक है।

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