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Exclusive: राम जन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में  रजा लाइब्रेरी से भेजी गई फारसी भाषा की रामायण

मुजस्सिम खान,

उत्तर प्रदेश के जनपद रामपुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध रजा लाइब्रेरी किताबी खजाने से लबरेज है देशभर में अयोध्या में बनाए जा रहे राम मंदिर के भव्य समारोह को लेकर जोरो जोरो से तैयारी चल रही हैं ऐसे में लाइब्रेरी की ओर से फारसी भाषा में अनुवादित की गई रामायण की प्रति को अयोध्या भेजा गया है। लाइब्रेरी प्रशासन के मुताबिक यह रामायण 300 वर्ष पहले अनुवादित की गई थी।

 

 

अंग्रेजी साम्राज्य के दौरान 1774 ईस्वी में एक रियासत के रूप में विकसित हुआ था। यहां पर देश की आजादी के बाद 1949 तक कुल 10 नवाबों ने शासन किया है। यही नहीं यहां के पहले शासक के रूप में विख्यात नवाब फैजुल्ला खान ने 7 अक्टूबर 1774 ईस्वी में अपने शासनकाल के दौरान लाइब्रेरी को स्थापित किया था। यह लाइब्रेरी वर्तमान समय में रजा लाइब्रेरी के रूप में विश्व विख्यात है। यहां पर अरबी, फारसी, उर्दू ,हिंदी, अंग्रेजी आदि भाषाओं में हजारों किताबें मौजूद हैं। जिनमें से वर्ष 1715 ईस्वी में साहित्यकार सुमेर चंद द्वारा फारसी भाषा में अनुवादित रामायण की इन दोनों काफी चर्चा हो रही है। अयोध्या मे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के आयोजन को लेकर 22 जनवरी की तारीख तय की गई है। जहां पर इस फारसी भाषा में अनुवादित रामायण की प्रति को भेजा गया है।

 

दिलचस्प बात यह है कि इस रामायण की भाषा फारसी होने के चलते इसके पाठ की शुरुआत बिस्मिल्लाह रहमान रहीम से होती है जबकि किसी भी हिंदू धर्म के मानने वालों के पवित्र धार्मिक ग्रंथ के पाठ से पहले भगवान गणेश मंत्र से शुरुआत किए जाने का प्रचलन है । लेकिन इसकी शुरुआत बिस्मिल्लाह रहमान रहीम से होना अपने आप में अद्भुत है ।

 

 

रजा लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन अबूसाद इस्लाही के मुताबिक नवाब रामपुर के द्वारा वर्ष 1715 ई मे प्रसिद्ध साहित्यकार सुमेर चंद अनुवादित फारसी भाषा की इस रामायण को लाइब्रेरी में रखा गया था 300 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है और यह धर्म ग्रंथ लाइब्रेरी को गौरान्वित करता चला रहा है। ढाई सौ वर्ष पहले लाइब्रेरी की स्थापना हुई थी जो वर्तमान समय में विश्व भर में रजा लाइब्रेरी के नाम से जानी जाती है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के कार्यक्रम को लेकर 22 जनवरी की तारीख की घोषणा की गई है और लाइब्रेरी का सौभाग्य है कि यहां की इस फारसी भाषा की रामायण की प्रति को सा सम्मान अयोध्या भेजा गया है।

 

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