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कठिन मेहनत, सादगी और सौम्यता से बरेली वासियों का दिल जीत रहे भाजपा प्रत्याशी छत्रपाल गंगवार

  • संघ से ताल्लुक रखते है प्रत्याशी छत्रपाल गंगवार
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  • अब दिन-रात घनघनाते फोन, हमारा प्रोग्राम लगवा दीजिए, भले ही पांच मिनट का हो

बरेली। …जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का। कठिन मेहनत के बल पर उनके संघर्ष को बयां करती यह पंक्तियां भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी छत्रपाल गंगवार पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। रिटायरमेंट के बाद जिस उम्र में सामान्य जन आराम से जीवन गुजारने की सोचते हैं। उस उम्र में भाजपा प्रत्याशी छत्रपाल गंगवार की मेहनत दो से तीन गुनी है। अपनी कठिन मेहनत, सादगी और सरलता के बल पर वह जनता के दिल में उतर चुके हैं।

 

 

 

शहर और गांव में चारो तरफ से उनके प्रोग्राम की डिमांड आ रही है। फोन करने वाले पर एक ही बात कहते हैं कि हमारे गांव में प्रोग्राम लगवा दीजिए। भले ही पांच मिनट का हो। छत्रपाल गंगवार किसी को भी निराश नहीं करते। वह प्रत्येक प्रोग्राम में स्वयं जाकर जनता का आशीर्वाद लेते हैं। क्या बड़े, क्या बच्चे। सब उनकी सरलता और सादगी के कायल हैं।

 

 

भाजपा ने 25 मार्च 2024 को देश भर के प्रत्याशियों की सूची में छत्रपाल गंगवार का नाम बरेली लोकसभा सीट से घोषित किया तो राजनीतिक पंडित हैरान रह गए। आठ बार के सांसद के व्यक्तित्व की तुलना में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए यह नया नाम था। मगर, छत्रपाल गंगवार ने जब अपनेी सादगी और सरलता से जनसंपर्क शुरू किया तो शहर और गांव की जनता ने उनको हाथोहाथ लिया।

 

 

खांटी संघ पृष्ठभूमि के छत्रपाल गंगवार की दिनचर्या आम आदमी की तरह बिल्कुल सामान्य है। वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठते हैं। दैनिक क्रिया कलाप से निवृत्त होकर चुनाव प्रचार को निकलते हैं। जहां भी जाते हैं तो भीड़ फूल मालाएं लेकर स्वागत को तैयार मिलती है। उनके बड़े भाई झम्मनलाल गंगवार बताते हैं कि छात्र जीवन से ही उनका अपना कोई शौक नहीं। न खाने का, न ही कपड़े पहनने का। सेवा भाव शुरू से ही है। संघ की पृष्ठभूमि होने की वजह से वह सामान्य सा कुर्ता पैजामा पहनते हैं। नौकरी में थे तो शर्ट पैंट पहन लेते थे।

 

 

 

घर से नाश्ता न करके निकले तो किसी से मांगकर खाने में भी शर्म नहीं। क्योंकि यही संघ से सीखा है। किसी तरह का दिखावा उनको पसंद नहीं। नजदीकी रिश्चतेदार नन्हेंलाल गंगवार के अनुसार वह नकारात्मक तो किसी के बारे में कभी सोचते ही नहीं। अपने जनसंपर्क अभियान में भी विपक्षी प्रत्याशी की आलोचना करना तो दूर की बात, कभी उनका नाम तक नहीं लेते। वह नीतियों के आधार पर राजनीति करते हैं। भाजपा और संघ की राष्ट्रवादी नीतियां उनको शुरू से ही पसंद हैं। वह हमेशा उसी पर चले।

 

 

 

चुनाव हारने पर भी कभी दल बदलने की नहीं सोची। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा का कहना है कि जब छत्रपाल जी प्रदेश सरकार में विधायक और राजस्व मंत्री थे, तब किसी भी समय फोन फौरन उठाते थे। जनता के जरूरी काम पर तुरंत उठकर चल देते थे। अब भी वही आदत है। वह अपनी जनसभाओं में भी कई बार कह चुके हैं कि सांसद नहीं, जनता के सेवक बनकर ही रहेंगे। सेवा भाव की उनकी मिसाल-बेमिसाल है।

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