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देश में बढ़ती अपराधिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार ओटीटी प्लेटफार्म : डा. शिवम यादव

ओटीटी प्लेटफार्म के नकारात्मक पक्ष पर कानूनी रूप से अंकुश लगाना जरूरी

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बरेली। आज के समय में तकनीक जिसे टेक्नोलॉजी कहते हैं, वो लगातार और तीव्रता के साथ बदल रही है। इसके व्यवहारिक पक्ष को हम सभी ने कोरोना काल में विशेष तौर पर महसूस किया, जब घर बैठे कार्य करने के लिए वर्चुअल और ऑनलाइन मीटिंग्स, स्कूल की कक्षाओं का संचालन या फिर वर्क फ्रॉम होम जैसे विभिन्न माध्यम आस्तित्व में आए। इतना ही नहीं कल तक जो फिल्में और टीवी विश्व भर में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन थे, आज इंटरनेट और विभिन्न ओटीटी प्लेटफार्म उनकी जगह ले चुके हैं।जब 2008 में भारत में पहला ओटीटी प्लेटफार्म लॉन्च हुआ था तब से लेकर आज जबकि लगभग 40 ओटीटी प्लेटफार्म हमारे देश में मौजूद हैं।

 

 

 

जहां एक ओर इसने मनोरंजन और इस क्षेत्र में संघर्षरत युवाओं के लिए नए आयाम खोले हैं, वहीं कई विवादों और चिंताओं को भी जन्म दिया है। आज मनोरंजन, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर जिस प्रकार की सामग्री ओटीटी प्लेटफार्म के माध्यम से परोसी जा रही है, वो देश के आमजन से लेकर बुद्धिजीवियों और अब तो सरकार तक के लिए भी चिंता का विषय बनती जा रही है।

 

फ़ोटो में डॉक्टर शिवम यादव

दअरसल फिल्मों के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फ़िल्म सर्टिफिकेशन है, टीवी के लिए न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी है, प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया है, लेकिन ओटीटी प्लेटफार्म पर नज़र रखने के लिए कोई संस्था नहीं है। लेकिन अगर कोई स्पष्ठ और सख्त कानून मौजूद होता जो इनकी “रचनात्मकता, अभिव्यक्ति और सृजनात्मकता” को सीमाओं के साथ परिभाषित करता तो लोगों या संस्थाओं को ओटीटी प्लेटफार्म के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह लड़ाई नहीं लड़नी पड़ती अपितु ये स्वयं कानून के दायरे में रहते और अपनी सीमाओं को भी पहचानते।

 

 

 

 

आज जिस प्रकार छोटे छोटे बच्चों द्वारा अपराध करने की घटनाएं सामने आ रही हैं या फिर छोटी छोटी बच्चियों के साथ यौन अपराध की घटनाएं बढ़ गई हैं, जैसा लगातार हम अखबार और न्यूज के माध्यम से देख रहे है कि अपराध की घटनाये बढती जा रही है और यही घटनायें कहीं न कहीं हमें ओटीटी प्लेटफार्म द्वारा परोसी जाने वाली सामग्री पर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस करा रहीं हैं। क्योंकि सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि इस प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री इंटरनेट पर स्मार्ट फोन पर बेहद सरलता से उपलब्ध है।

 

 

 

 

उस स्मार्ट फोन पर जो आज छोटे से छोटे बच्चे के हाथ में है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वो ओटीटी प्लेटफार्म को नियंत्रित करने के लिए दिशा निर्देश उसके सामने प्रस्तुत करे।

उम्मीद है कि शीघ्र ही हमारे देश में भी ओटीटी प्लेटफार्म के नकारात्मक पक्ष पर कानूनी रूप से अंकुश लगाया जाएगा ताकि अपने सकारात्मक पक्ष के साथ यह खुलकर समाज की उन्नति में अपना योगदान दे सके।

डा. शिवम यादव की कलम से
(फिल्म निर्देशक), बरेली

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