नो यूपीआई डे पर सड़कों पर उतरे व्यापारी, एमडीआर के विरोध में सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश

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बरेली। यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर व्यापारियों का विरोध अब सड़क तक पहुंच गया है। बरेली में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के आह्वान पर व्यापारियों ने ‘नो यूपीआई डे’

मनाते हुए पैदल मार्च निकाला। हाथों में विरोध से जुड़ी तख्तियां लेकर व्यापारियों ने एमडीआर के खिलाफ नारेबाजी की। श्यामगंज चौराहे पर कुछ व्यापारियों ने यूपीआई स्कैनर जलाकर अपना विरोध भी दर्ज कराया।

 

व्यापार मंडल के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री राजेश जसोरिया के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में व्यापारियों ने यूपीआई पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की। मार्च की अगुवाई महानगर उपाध्यक्ष दुर्गेश खटवानी ने की।

राजेश जसोरिया ने कहा कि कारोबारी पहले से ही विभिन्न प्रकार के कर और अन्य आर्थिक दायित्वों का भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो इसका सीधा असर व्यापारियों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूपीआई आज छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है।

उन्होंने दावा किया कि डिजिटल भुगतान बढ़ने से नकदी रखने की जरूरत कम हुई और इससे व्यापारिक लेनदेन में सुविधा बढ़ी है। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई के जरिए प्राप्त भुगतान का बिल बनाकर उस पर नियमानुसार जीएसटी भी जमा किया जाता है। इसके बावजूद एमडीआर के रूप में अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का वे विरोध कर रहे हैं।

जसोरिया ने कहा कि यदि 15 अक्टूबर से एमडीआर लागू किया गया तो व्यापार मंडल आंदोलन को और व्यापक करेगा। उन्होंने जरूरत पड़ने पर देशव्यापी बंद का आह्वान करने की चेतावनी भी दी।

श्यामगंज चौराहे पर महानगर उपाध्यक्ष श्याम मिठवानी के नेतृत्व में व्यापारियों ने यूपीआई स्कैनर जलाकर विरोध जताया। प्रदर्शन में ईशन गुप्ता, शुभम अग्रवाल, मुकुल मित्तल, अजय गुप्ता, अंकित अग्रवाल, रवि अरोड़ा, सौरभ श्रीवास्तव, अविनाश मित्तल, अनिल गुप्ता, गिरधारी देवनानी, त्रिलोकी नाथ गुप्ता, मुकेश खटवानी समेत विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी और व्यापारी शामिल रहे।

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Author: newsvoxindia

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