रील के चक्कर में रियल जिंदगी से खिलवाड़: नवाबगंज में दर्दनाक हादसा, देशभर में बनती जा रही जानलेवा सनक

Picture of newsvoxindia

newsvoxindia

FOLLOW US:

SHARE:

बरेली। सोशल मीडिया पर रील बनाने का जुनून अब एक खतरनाक बीमारी का रूप लेता जा रहा है। फेमस होने और लाइक्स की दौड़ में युवा न केवल अपनी सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं, बल्कि कई बार इसकी कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला बरेली जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां रील बनाते समय ऊंचाई से फिसलकर गिरने से एक युवक की पत्थरों के नीचे दबकर मौत हो गई।

घटना बरेली–सितारगंज हाईवे से जुड़े नवाबगंज क्षेत्र की है। सिजौलिया गांव के पास बाईपास निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण के दौरान मिट्टी रोकने के लिए सड़क किनारे बड़े-बड़े पत्थर असंतुलित अवस्था में लगाए गए थे, जो बाहर की ओर लटके हुए थे। इन्हीं पत्थरों पर चढ़कर रील बनाना युवक को भारी पड़ गया।
नवाबगंज नगर से सटे ग्राम रिछोला किफायतुल्ला निवासी मौलाना हाजी मेंहदी हसन के 20 वर्षीय पुत्र मोहम्मद फैजान को सोशल मीडिया पर रील बनाने का शौक था।

 

शुक्रवार दोपहर वह अपने दोस्त अनुज गंगवार के साथ हाईवे किनारे रील बनाने पहुंचा। रील शूट करते समय फैजान सड़क किनारे रखे पत्थरों पर चढ़ गया। अचानक पत्थर खिसक गए और फैजान उनके साथ नीचे गिर पड़ा। गिरते ही वह भारी पत्थरों के नीचे दब गया।मौके पर मौजूद दोस्त और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाने का प्रयास किया, लेकिन पत्थर अत्यधिक भारी होने के कारण उन्हें हटाया नहीं जा सका। बाद में ट्रैक्टर की मदद से पत्थर हटाए गए, लेकिन तब तक फैजान की मौत हो चुकी थी।

 

सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और शव को घर ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार श्रीवास्तव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की।मोहम्मद फैजान चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके पिता दिल्ली की एक मस्जिद में इमाम हैं। बेटे की असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।


यह हादसा केवल एक युवक की मौत नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की रील संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। देशभर में अब तक रील बनाने के चक्कर में पुलों, नदियों, पहाड़ों, रेलवे ट्रैक और ऊंची इमारतों से गिरकर दर्जनों युवाओं की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया का यह ट्रेंड युवाओं की आंखों के साथ-साथ उनके दिमाग को भी प्रभावित कर रहा है, जहां असली जिंदगी से ज्यादा वर्चुअल पहचान अहम हो गई है।

यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि निर्माण स्थलों की सुरक्षा के साथ-साथ युवाओं को भी यह समझाने की जरूरत है कि कुछ सेकंड की रील के लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगाना किसी भी कीमत पर सही नहीं है।

newsvoxindia
Author: newsvoxindia

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ी गई न्यूज