बरेली। आंवला लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के दौरान हटाए जाने के मामले को लोकतंत्र पर हमला बताया। बरेली के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रश्न है।

उन्होंने कहा कि संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा जाएगा। इसके साथ ही किसानों की समस्याएं, शिक्षा व्यवस्था, स्मार्ट सिटी, एमएसपी, शिक्षकों की मांगें, 300 बेड अस्पताल, एम्स, रबर फैक्ट्री और राम मंदिर में चढ़ावे की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
नीरज मौर्य ने कहा कि सोनम वांगचुक और उनके समर्थकों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सांसद ने कहा कि प्रदेश में सरकारी स्कूलों का स्तर लगातार गिर रहा है और कई विद्यालय बंद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था की यह स्थिति क्यों बनी। साथ ही सांसद टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करने की भी मांग की है।
स्मार्ट सिटी योजना पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बरेली में कहीं भी स्मार्ट सिटी जैसा विकास दिखाई नहीं देता। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी के नाम पर केवल धन की बर्बादी और भ्रष्टाचार हुआ है।
किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए नीरज मौर्य ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। उन्होंने बताया कि आंवला क्षेत्र के कसूरा गांव में पिछले 15 दिनों से ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने मक्का पर एमएसपी की कानूनी गारंटी और डीजल-पेट्रोल की कीमतों पर नियंत्रण की मांग भी उठाई।
बरेली और बदायूं के शिक्षकों के आंदोलन का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है और इन मुद्दों को भी संसद में उठाया जाएगा।राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर नीरज मौर्य ने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे आम लोगों को भी यह जानकारी मिल सके कि कितने दिनों में कितना चढ़ावा आया। उन्होंने सुझाव दिया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे और उसके उपयोग का विवरण प्रत्येक सप्ताह या कम से कम हर महीने सार्वजनिक किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और किसी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।
प्रेसवार्ता के अंत में सांसद ने कहा कि संसद के आगामी सत्र में किसानों, युवाओं, शिक्षकों और आम जनता से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। प्रेसवार्ता में जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव ,पूर्व प्रवक्ता मयंक मोंटी शुक्ला सहित अन्य कई मौजूद रहे।



