बरेली।
बिहारीपुर निवासी मोहित रस्तोगी ने 17 अक्टूबर 2025 को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी थी। उनके मुताबिक, एक अनजान नंबर से उन्हें व्हाट्सऐप पर ट्रेडिंग से जुड़े ग्रुप में शामिल किया गया। ग्रुप में मौजूद लोगों ने ट्रेडिंग ऐप के माध्यम से निवेश करने पर बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया। इस झांसे में आकर युवक ने अलग-अलग खातों में करीब 10.50 लाख रुपये भेज दिए। रकम ट्रांसफर करने के बाद जब मुनाफे की रकम नहीं मिली और संपर्क संदिग्ध लगने लगा, तब उन्हें ठगी का पता चला।
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। एसएसपी और एसपी क्राइम के निर्देश पर साइबर थाना टीम ने साइबर पोर्टल, बैंकों और दूसरी संबंधित संस्थाओं से जानकारी जुटाकर पैसों के ट्रांजेक्शन की पूरी कड़ी को खंगाला। जांच के दौरान जिन खातों में रकम पहुंची, उनके आधार पर मनी ट्रेल को आगे बढ़ाया गया।
पुलिस के प्रयास से ठगी गई रकम में से 8,62,365 रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए गए। वहीं, बाकी रकम अलग-अलग हिस्सों में गेमिंग ऐप के जरिए ट्रांसफर किए जाने की जानकारी मिली है। शेष धनराशि की वापसी के लिए भी पुलिस की कार्रवाई जारी है।
जांच में पश्चिम बंगाल के रहने वाले दो आरोपितों के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों के खिलाफ आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय भेजा जा रहा है। इस कार्रवाई में विवेचक प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडेय और कांस्टेबल विजय कुमार शामिल रहे।
साइबर पुलिस ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश से पहले पूरी जानकारी की जांच करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें और ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई पिन तथा बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें।



