सीटी स्कैन कोरोना काल में हुआ वरदान साबित , जानिए स्वास्थ्य से जुड़ी यह खबर

SHARE:

 

दिल्ली  :कोरोना काल में हर तरह की  परेशानियां बड़ी तो वही मानवीय जीवन भी प्रभावित हुआ नई नई बीमारियां आई तो डॉक्टरों ने कोरोना से लड़ने के लिए अपने अनुभव का भी प्रयोग किया | ऐसे ही कुछ मामलों में इस जांच से मरीज के फेफड़े में जख्म के भी निशान मिले जो शुरुआती चरण के लंग कैंसर के संकेत हैं।आम तौर पर लंग कैंसर की पहचान आखिरी चरण में ही हो पाती है जिससे  इलाज के नतीजे बहुत ही कम असरकारी होते हैं। हालांकि कोविड 19 प्रोटोकॉल के तहत सीटी स्कैन कराया जाना कुछ मरीजों में छिपे इस रोग की पहचान के लिए वरदान साबित हुआ है।

 
कई मरीज गंभीर हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन  का स्तर कम होना) की शिकायत लेकर  हॉस्पिटल पहुंचे और उन्हें सीने का सीटी स्कैन कराने की सलाह दी गई। कुछ मामलों में रिपोर्ट से जाहिर हो गया कि कोविड संक्रमण के साथ ही मरीज का फेफड़ा भी क्षतिग्रस्त  हुआ है।
 
मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल, पटपड़गंज एवं वैशाली में मेडिकल ऑन्कोलॉजी की डायरेक्टर डॉ. मीनू वालिया ने कहा, ‘मरीजों में कैंसर के शुरुआती लक्षण के संकेत के तौर पर जख्म मिलने पर उन्हें बायोप्सी की सलाह दी गई। ऐसे मरीजों की रिपोर्ट से कैंसर की पुष्टि भी हो गई और शुरुआती जांच कराने के कारण उन्हें बेहतर परिणाम पाने के लिए सही इलाज करने में निश्चित रूप से मदद मिली।’

ग्लोबाकैन इंडिया फैक्टशीट के आंकड़ों के मुताबिक, 2018 (कोविड से पहले) में नए मामलों की कुल संख्या 67795 रही जिनमें 48698 पुरुष (कुल 72 फीसदी) थे। वहीं 2020 में पाए गए कुल 72510 मामलों में 51675 मामले पुरुषों के थे। हालांकि धूम्रपान करने और नहीं करने वालों के बीच लंग कैंसर के आंकड़े बताते हैं कि 2018 में धूम्रपान नहीं करने वालों में कुल 5 फीसदी ही लंग कैंसर के मामले थे जो 2020 में बढ़कर 5.8 फीसदी हो गए।
 
मैक्स हॉस्पिटल के आंकड़े बताते हैं कि 2020 से पहले लगभग 15 फीसदी मरीजों में शुरुआती चरण के कैंसर पाए गए जबकि 85 फीसदी मामले कैंसर के एडवांस्ड स्टेज के थे। लेकिन पिछले दो वर्षों के दौरान शुरुआती चरण के कैंसर के मामले जांच बढ़ने के कारण लगभग 5 फीसदी बढ़े हैं।
 
डॉ. वालिया ने यह भी बताया  कि फेफड़े में जख्म की अचानक पहचान (इनमें से कुछ मामले कैंसर की भी पुष्टि करते हैं) कुछ मरीजों में छिपे इस रोग के उजागर होने के लिए वरदान साबित हुई जिनमें पहले से कैंसर के कोई लक्षण नहीं थे। इससे बेहतर इलाज परिणाम पाने में मदद मिलेगी और मरीजों की जीवन गुणवत्ता सुधारने का रास्ता साफ होगा।’
हालांकि डॉ. वालिया ने स्पष्ट किया कि सीटी स्कैन की कम खुराक की सलाह कुछ अधिक जोखिम वाले समूह (धूम्रपान करने वालों, तंबाकू का सेवन करने वालों आदि) को ही दी जाती है और इसे नियमित जांच के रूप में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
 
उन्होंने यह भी  कहा, ‘हम लंग कैंसर के अधिक खतरे वाले चुनिंदा समूह में सीटी स्कैन की कम खुराक की सलाह देते हैं ताकि उनमें अगर लंग कैंसर निकले भी तो शुरुआती चरण के हों। लेकिन सुरक्षात्मक जीवनशैली अपनाना और धूम्रपान का त्याग करना अब भी इस तरह के रोग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

cradmin
Author: cradmin

Leave a Comment

error: Content is protected !!