
भीम मनोहर
बरेली | फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव शेखापुर के रहने वाले एक पिता ने संघर्ष कर अपने बेटे को सेना में लेफ्टिनेंट बनाया है | पिता एक किराने की दुकान पर काम करते है | उन्होंने अपने बेटे के भविष्य के लिए पत्नी के साथ मिलकर सपने देखे और संघर्ष किया | पिता बेटे की किस्मत बनाने के लिए फरीदपुर से बरेली आ गए और पति पत्नी दोनों अपनी पढ़ाई के मुताबिक नौकरी देख ली | पिता ने पहले एक व्यापारी के यहां छोटी सी नौकरी की वही उनकी पत्नी ने एक स्कूल में टीचर की नौकरी ज्वाइन कर ली | पति -पत्नी का संघर्ष रहा लगातार चलता रहा | बेटे की पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आये इसके लिए संघर्ष करते रहे कभी इस काम में उनके लाला ने बच्चे की फीस देने में मदद की तो कही बच्चे की पढ़ाई में लगन देखते हुए फीस से मुक्ति मिल गई |

पिता की मेहनत ने बेटे के सपनों में भरे रंग फरीदपुर क्षेत्र के ग्राम शेखापुर के रहने वाले अनिल तिवारी ने अपने बेटे उत्कर्ष तिवारी की पढ़ाई में लगन को देखते हुए अपनी पत्नी कल्पना तिवारी से विशेष ध्यान देने को कहा , दोनों ने तय किया वह अपने बेटे को उसकी इच्छानुसार आगे बढ़ने के लिए पूरा समर्थन देंगे | रूपए पैसे से भी किसी भी हालात में दिक्कत नहीं होंगे देंगे | वही उत्कर्ष ने अपने माता पिता की मेहनत के साथ पूरा न्याय किया | वह शुरूआती जीवन से पढ़ाई में नंबर वन रहे | उत्कर्ष के माता पिता ने बताया कि उन्होंने बेटे की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया। उत्कर्ष तिवारी ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई बरेली के राधा माधव पब्लिक स्कूल में की है। और उसके बाद वह साढ़े 17 वर्ष की उम्र में 1 फरवरी 2017 को इंडियन आर्मी के लिए टेक्निकल एंट्री स्कीम टेस्ट से सिलेक्ट हुए। उसके बाद 2 जुलाई 2017 को ऑफिसर ट्रेनिंग अकैडमी विहार के गया जनपद में जॉइनिंग मिली, 2018 से 2021 तक कैडेट्स ट्रेनिंग बिंग कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग में ट्रेनिंग की उसके बाद 12 जून 2021 को पुणे में पासिंग आउट परेड के बाद उत्कर्ष इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बन गए।

उत्कर्ष ने पिता को बताया अपना अच्छा दोस्त :
उत्कर्ष ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता अनिल तिवारी को दिया है | उत्कर्ष ने बताया की उसके पिता उसके सबसे पहले फ्रेंड है और उसके जीवन के आखिरी प्यार भी है | उसके पिता ने उसे बहुत बढ़िया से सपोर्ट किया है साथ ही हर परिस्थिति में उस पर विश्वास रखा और मुझे अपना सपना पूरा करने का मौका दिया | मैं कह सकता हूँ कि मेरे पिता मेरी सफलता की मुख्य कड़ी है | मैं ईश्वर से प्रार्थना करूँगा की धरती पर हर किसी को मेरे पिता की तरह पिता मिले |
बेटे के लेफ्टिनेंट बनने पर पिता ने कराया कथा पाठ
अनिल तिवारी का बेटा उत्कर्ष सेना में लेफ्टिनेंट बना तो पिता ने ईश्वर को धन्यवाद देने के लिए कथा पाठ का आयोजन कराया | पिता अनिल तिवारी ने बताया कि जब से बेटा लेफ्टिनेंट बना तब से अच्छे रिश्ते आना भी शुरू हो गए साथ ही जिन रिस्तेदारों ने आर्थिक तंगी के चलते दूरी बना ली थी आज वह भी उनकी खुशियों में शरीक है |




