
ज्योतिषाचार्य मुकेश मिश्रा
बरेली। ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी स्नान दान के पर्व गंगा दशहरा के दिन गुरु ग्रह वक्री हो रहे हैं, देव गुरु बृहस्पति धन, विवाह, ज्ञान और सत्कर्म के कारक है, देव गुरु बृहस्पति को सर्वाधिक शुभ एवं शीघ्रफलदाई ग्रह माना गया है, यह धनु व मीन राशि के स्वामी है, 20 जून को ये वर्की होंगे और 120 दिन बाद 18 अक्टूबर को मार्गी होंगे,ज्योतिष में मानते हैं कि गुरु के वक्री होने पर कर्क राशि और मकर राशि पर भी खास प्रभाव पड़ता है, एक राशि पर अच्छा तो दूसरी पर विपरीत प्रभाव होता है गुरु कुंभ राशि में ही वक्री हो रहें हैं इसलिए इस राशि के लोगों को खास ध्यान देने की आवश्यकता है इस राशि के लोगों को सेहत का खास ध्यान रखना होगा गुरु ग्रह के कुंभ में वक्री होने से मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के लोगों का खासा लाभ होगा हालांकि कुछ चीजों में इन्हें भी परेशानी होगी, लेकिन धन के मामले में इन्हें फायदा होगा कन्या राशि के लोगों को सेहत और वैवाहिक जीवन में कुछ विपरीत प्रभाव देखने को मिलेंगे तुला वालों को भी कुछ बात बिना सोचे समझे नहीं बोलनी है कुंभ वालों को सेहत का ध्यान रखना होगा इस समय किसी पर विश्वास न करें बाकी राशियों के लिए गुरु देव का राशि परिवर्तन शुभ है !!
गंगा दशहरा की विशेषता और शुभ मुहूर्त
सनातन धर्म में गंगा दशहरा का बहुत महत्व है हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है, इस बार यह तिथि 19 जून शनिवार को शाम 06 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर 20 जून रविवार को शाम 04 बजकर 18 मिनट पर खत्म होगी, ऐसे में इस बार यह पर्व दो दिन का होगा लेकिन मुख्य तौर पर इसे 20 जून को ही मनाया जाएगा, मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था, इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान कर माता गंगा की पूजा-आरती करते हैं, साथ ही इस दिन दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है !
गंगा दशहरा का महत्त्व:- हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष महत्व है, गंगा दशहरा के दिन हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले गंगा जन्मोत्सव मनाते हैं, धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां गंगा स्वर्ग से उतरकर धरती पर आई थीं, इसके बाद से हिंदू धर्म में मां गंगा की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत हुई, माना जाता है कि गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान और दान- पुण्य करने से कई महायज्ञों के फल के बराबर फल मिलता है, इस दिन सत्तू, मटका और हाथ का पंखा दान करने की परंपरा है ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है




