बरेली।13 सफर के मौके पर इमाम हुसैन (अ.स.) की लाडली बेटी जनाबे सकीना की शहादत की याद में सक्का-ए-सकीना कमेटी की ओर से पारंपरिक जुलूस-ए-आलम अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस इमामबाड़ा शाह शियां चौक, गढ़ैया से शुरू हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

जुलूस से पहले आयोजित मजलिस को मौलाना आज़म हुसैन जैदी ने खिताब किया। उन्होंने कर्बला के वाकये, जनाबे सकीना की जिंदगी, उनके सब्र और कुर्बानी पर विस्तार से रोशनी डालते हुए कहा कि अहलेबैत की तालीमात इंसानियत, सब्र और इंसाफ का संदेश देती हैं। उन्होंने लोगों से इन शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।
मजलिस के बाद जुलूस-ए-आलम अपने तय मार्ग पर रवाना हुआ। शहर की विभिन्न अंजुमनों के साथ बाहर से आए नौहाख्वानों ने नौहाख्वानी और सीना ज़नी के जरिए शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। पूरे रास्ते “या हुसैन” और “या सकीना” की सदाओं से माहौल गमगीन और अकीदतमय बना रहा। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।

सक्का-ए-सकीना कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि 13 सफर का यह जुलूस पिछले 19 वर्षों से लगातार निकाला जा रहा है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य नई पीढ़ी तक कर्बला की कुर्बानी और जनाबे सकीना की शहादत का संदेश पहुंचाना है।
जुलूस के सफल आयोजन में कमेटी के सदर रेहान ज़ैदी, जनरल सेक्रेटरी फ़ैहमी ज़ैदी, अदनान नकवी, कौनेन आब्दी, अलमास ज़ैदी, पयाम नकवी, ज़मीर ज़ैदी, अंबर नकवी सहित सभी पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रशासन की निगरानी में जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से अपने निर्धारित मार्ग से होकर संपन्न हुआ।



