बरेली। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच बरेली की आंवला विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के युवा नेता पीयूष वर्मा ने अपनी दावेदारी पेश कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पीयूष वर्मा का कहना है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) विचारधारा से प्रभावित होकर उन्होंने सपा का दामन थामा है। उन्हें उम्मीद है कि पार्टी नेतृत्व आंवला से उन्हें प्रत्याशी बनाएगा।
पीयूष वर्मा के मुताबिक, उनके पिता स्वास्थ्य विभाग में अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भाजपा से की थी। पिछले करीब 10 वर्षों से वह फरीदपुर, आंवला और बिथरी विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहकर जनसमस्याओं को उठाते रहे। हालांकि, वर्ष 2024 में उन्होंने भाजपा छोड़ने का फैसला किया। उनका आरोप है कि भाजपा में युवाओं की आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था और युवा नेताओं को सरकार में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा था।
अब पीयूष वर्मा आंवला विधानसभा से चुनाव लड़कर क्षेत्र की जनता की आवाज बनने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और विकास की कमी का मुद्दा उठाते हुए मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि मंत्री अपने बेटे यशवंत को विधानसभा का टिकट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
पीयूष वर्मा ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक प्रतिनिधित्व मिलने के बावजूद आंवला क्षेत्र में युवाओं के रोजगार, चीनी मिल और जिला बनाने जैसे मुद्दे अधूरे हैं। उनका कहना है कि लोध समाज को भी अपेक्षित राजनीतिक और विकास संबंधी लाभ नहीं मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी उन्हें टिकट देती है तो वह आंवला के विकास के साथ लोध समाज के हितों के लिए भी काम करेंगे। उनका दावा है कि आंवला सीट पर मौर्य समाज के कई प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। यदि उन्हें मौका मिला तो पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के सहयोग से इस स्थिति को बदलने का प्रयास करेंगे।



