पार्थ फाउंडेशन के दीपावली अभियान के तहत 2100 परिवारों तक पहुंची मदद, बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का दिया भरोसा; मेयर उमेश गौतम ने भी शहरवासियों और बुजुर्गों से मांगा आशीर्वाद
बरेली। जरूरतमंदों की मदद करना कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। यह कहना है मेयर उमेश गौतम के बेटे और पार्थ फाउंडेशन के प्रमुख पार्थ गौतम का। उन्होंने साफ कहा कि उनका फाउंडेशन लंबे समय से जरूरतमंद परिवारों की सहायता कर रहा है और इस सेवा कार्य को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि यदि जनता उन्हें चुनाव मैदान में उतरने के लिए कहेगी तो वह शहर या कैंट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।

दीपावली के अवसर पर आयोजित विशेष अभियान का जिक्र करते हुए पार्थ गौतम ने बताया कि पार्थ फाउंडेशन ने इस बार 2100 जरूरतमंद परिवारों तक अपनी पहुंच बनाई। इन परिवारों को दीपावली के उपहार देने के साथ ही उनके बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग का भरोसा दिलाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा अधूरी न रहे, इसके लिए फाउंडेशन हरसंभव मदद करेगा। पार्थ ने शहरवासियों को भरोसा दिलाया कि जरूरत के समय उनका फाउंडेशन और वह स्वयं 24 घंटे लोगों की सहायता के लिए उपलब्ध हैं।
बुजुर्गों का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी ताकत: उमेश गौतम
इस मौके पर मेयर उमेश गौतम ने भी शहरवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनका संदेश घरों में मौजूद बुजुर्गों तक जरूर पहुंचाया जाए कि मेयर उमेश गौतम और उनके बेटे पार्थ की ओर से उन्हें दीपावली की बधाई और शुभकामनाएं हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के आशीर्वाद की ताकत ही है कि आज तक कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाया।
मेयर ने कार्यक्रम में मौजूद मीडियाकर्मियों को भी दीपावली की शुभकामनाएं दीं और उपहार भेंट कर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे पार्थ?
शहर में मेयर उमेश गौतम और उनके बेटे पार्थ गौतम की सक्रियता लगातार चर्चा में है। एक ओर उमेश गौतम अपने सामाजिक और राजनीतिक अनुभव के साथ बेटे को प्रोत्साहित कर रहे हैं, तो दूसरी ओर पार्थ गौतम सामाजिक गतिविधियों के जरिए लोगों के बीच अपनी पहचान मजबूत करने में जुटे हैं। पार्थ फाउंडेशन के अभियान और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब पार्थ के चुनाव लड़ने संबंधी बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि उन्होंने चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला जनता की इच्छा पर छोड़ दिया है, लेकिन शहर या कैंट विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरने की उनकी बात ने भविष्य की सियासी संभावनाओं को लेकर चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।



