बरेली। करीब सात वर्षों तक बंद रहने के बाद बरेली की ऐतिहासिक जिला जेल एक बार फिर आबाद हो गई है। शनिवार को केंद्रीय कारागार-2, बिथरी चैनपुर से पहले चरण में बंदियों को कचहरी स्थित नई जिला जेल में शिफ्ट किया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई इस प्रक्रिया के साथ जेल परिसर में नियमित गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं।
करीब 172 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस जेल को आधुनिक सुविधाओं और हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था से लैस किया गया है। लगभग 85 एकड़ क्षेत्र में फैली जेल में बंदियों की क्षमता 1200 से बढ़ाकर 2579 कर दी गई है। परिसर में हाई सिक्योरिटी बैरक, आधुनिक कंट्रोल रूम, सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क, चिकित्सा सुविधाएं और कर्मचारियों के आवास की व्यवस्था की गई है।

जेल प्रशासन के अनुसार पहले चरण में विचाराधीन बंदियों और सात वर्ष से कम सजा पाने वाले कैदियों को यहां रखा जाएगा। वहीं सात वर्ष से अधिक सजा पाने वाले और कुख्यात अपराधी बिथरी स्थित केंद्रीय कारागार में ही रहेंगे। महिला और पुरुष बंदियों के लिए अलग-अलग बैरकों की व्यवस्था भी की गई है।
नई जेल का ऐतिहासिक महत्व भी है। वर्ष 1848 में स्थापित इस कारागार में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित कई स्वतंत्रता सेनानी बंद रह चुके हैं। नेहरू ने अपनी आत्मकथा में भी बरेली जेल का उल्लेख किया है। इसके अलावा गोविंद बल्लभ पंत, खान अब्दुल गफ्फार खान, एम.एन. रॉय और साहित्यकार यशपाल जैसी हस्तियां भी यहां रह चुकी हैं।स्थानीय लोगों का मानना है कि जेल के दोबारा शुरू होने से आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और छोटे कारोबारियों को भी लाभ मिलेगा।
जेल अधीक्षक डॉ. आलोक कुमार शुक्ला ने बताया कि फिलहाल पहले चरण में 150 बंदियों को नई जिला जेल में भेजने की तैयारी की गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रदेश के जेल मंत्री द्वारा जेल का औपचारिक उद्घाटन भी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिला जेल के दोबारा शुरू होने से पुलिस और जेल प्रशासन को काफी सुविधा मिलेगी। अब बंदियों को पेशी के लिए दूर स्थित बिथरी जेल से लाने-ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी। कचहरी के नजदीक जेल होने के कारण बंदियों की अदालत में पेशी आसान और तेज होगी।
इसके अलावा बंदियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं उनके परिजनों को मुलाकात के लिए अब करीब 20 किलोमीटर दूर बिथरी चैनपुर नहीं जाना पड़ेगा। शहर के बीच स्थित जिला जेल में पहुंचना आसान होने से परिवारों को भी राहत मिलेगी।




