एक सप्ताह में तीन अलग-अलग घटनाएं, न्याय की आस में जान जोखिम में डाल रहे लोग; शिकायत निस्तारण व्यवस्था पर उठे सवाल।
बरेली। बरेली में पिछले एक सप्ताह के दौरान आत्मदाह के प्रयास की लगातार सामने आई तीन घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है। अलग-अलग स्थानों पर हुई इन घटनाओं में एक बात समान रही—संबंधित लोगों ने अपनी समस्याओं के समाधान में देरी या असंतोष जताते हुए आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। हालांकि तीनों मामलों में पुलिस और प्रशासन की सतर्कता से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
पहला मामला कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सामने आया, जहां एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर कथित रूप से आत्मदाह का प्रयास किया। समय रहते मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया और स्थिति पर नियंत्रण पा लिया।
दूसरी घटना बहेड़ी क्षेत्र की एक महिला ने संबंधित है जिसने अपनी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए एसएसपी कार्यालय के बाहर खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर महिला को सुरक्षित बचा लिया।
तीसरा और ताजा मामला शनिवार को फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के टिटौली गांव का है। यहां किसान ने आरोप लगाया कि गाटा संख्या 232 की उनकी करीब एक बीघा चार बिस्वा जमीन पर वर्षों से कब्जा है और कई शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हुआ। उनकी ओर से मामला उठा रहीं महिला जिला पंचायत सदस्य भी मौके पर मौजूद थीं। एसडीएम के निर्देश पर राजस्व और पुलिस टीम ने पैमाईश की, लेकिन जब तत्काल कब्जा नहीं दिलाया गया तो दोनों ने कथित रूप से अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क लिया। थाना प्रभारी प्रवीण कुमार ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए पेट्रोल की बोतल छीन ली और दोनों को सुरक्षित बचा लिया। इसके बाद राजस्व विभाग ने करीब तीन घंटे तक दोबारा पैमाईश कर खेत की सीमाएं चिन्हित कीं। हालांकि मौके पर कब्जा नहीं दिलाया जा सका और बाद में धरना समाप्त हो गया।
इन घटनाओं ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिकायतों के निस्तारण में हो रही देरी लोगों का भरोसा कमजोर कर रही है, या फिर आत्मदाह जैसे प्रयास प्रशासन पर दबाव बनाने का माध्यम बनते जा रहे हैं? प्रशासन का कहना है कि सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है, जबकि फरियादियों का दावा है कि समय पर समाधान न मिलने के कारण उन्हें ऐसे कदम उठाने पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्रभावी संवाद और कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई—तीनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। इससे न केवल लोगों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि आत्मघाती कदम उठाने जैसी घटनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।



