

राजकुमार
फतेहगंज पश्चिमी। स्थानीय कस्बा में स्मैक तस्कर नन्ने लगड़ा के ढाए गए बारात घर के मलवे से कस्बा के कुछ लोग जीवन का रिस्क लेकर मलवे के अंदर घुसकर टैंट का सही सामान निकालने का काम किसकी अनुमति पर कर रहे है।यह किसी को जानकारी नही है। पुलिस और बीडीए दोनो ही मलवे के अंदर घुसकर सामान निकालने का निर्देश देने से इनकार कर रहे है।
कस्बा के एक शातिर स्मैक तस्कर नन्ने लगड़ा का हाइवे के पास मौजूद बारात घर को अबैध बताकर बीडीए और पुलिस ने दो दिन पहले गिरा दिया था।दो मंजिला आलीशान बरातघर मजबूती के कारण छह बुल्डोजर से करीब 36 घंटे में गिराया गया था। उसके मलवे को रखाने के लिए और सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस पिकेट की भी तैनाती की गई थी। लेकिन रविवार को कस्बा निवासी बरातघर के कुछ कर्मचारी जीवन का रिस्क लेकर मलवे के अंदर घुसकर टूट फुट से बचे प्लेट,कुर्सी, ऐसी, आदि निकालने का काम कर रहे थे। पिछले दो दिन से लगी पुलिस पिकेट भी मौजूद नही थी। यह लोग कौन है और किसके आदेश से मलवे के अंदर घुसकर सामान निकाल रहे थे। यह किसी को नही पता। पुलिस और बीडीए दोनो ही मलवे से सामान निकालने के निर्देश से इनकार कर रहे है। पुलिस बीडीए के आदेश पर और बीडीए पुलिस के आदेश पर मलवे से सामान निकालने की बात कह रही है।
सुरेन्द्र सिंह पचौरी थाना प्रभारी फतेहगंज पश्चिमी ने बताया कि पुलिस तो बीडीए का सुरक्षा की दृष्टि से सहयोग करती है।वह हम कर रहे है।हमारी ओर से मलवे की सुपर्दगी किसी को नही दी गयी है। यह बीडीए ने दी होगी इसकी हमे जानकारी नही है। वही एसपी सिंह जेई बीडीए ने बताया कि पुलिस ढाए गए बरातघर के मलवे की सुपर्दगी हमने नही दी है। न ही उसमे से सामान निकलने की किसी को अनुमति दी है। मलवा की देखभाल को पुलिस पिकेट लगी थी।कैसे हटी हमे जानकारी नही है।
कही बुल्डोजर का किराये की भरपाई तो नही की जा रही मलवे से
स्मैक तस्कर के बरातघर को ढहाने के लिए पांच जेसीवी से जब बरात घर की बिल्डिंग दो दिन में नही गिरी तब पुकलैंन मंगवाई गयी थी।जिसने छह घंटे में बारात घर को ढहाकर मलवे में बदल दिया था। इस काम के पुकलैंन मालिक ने एक लाख रुपये तय किये थे।बीडीए कर्मचारियों ने बारातघर जल्दी ढहाने की बजह से पुकलैंन मालिक से एक लाख देने की बात कह दी। लेकिन काम होने पर रात में ही जब उसने पैसे मांगें तो बीडीए कर्मचारी आपस मे खींचतान कर रहे थे। सूत्रों की माने पैसे देने की खींचतान की चर्चा अधिक नही हो इसलिए अगले दिन पुकलैंन मालिक से पैसे देने की बात कह दी गयी थी। कहीं पुकलैंन का किराया की भरपाई के लिए तो मलवे से सामान निकालने की अनुमति तो नही दी गयी है।




