दांपत्य जीवन में लाना चाहते है खुशी, तो करना होगा यह उपाय

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ज्योतिषाचार्य- आचार्य मुकेश मिश्रा


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बरेली। हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत बेहद ख़ास और महत्त्व पूर्ण होता है, इसे सुहागिन महिलायें अपने अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। यह व्रत हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है।वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य की कामना और संतान प्राप्ति की दृष्टि से बहुत ही शुभ फलदायी होता है। इस बार बट सावित्री अमावस्या पर शुक्र ग्रह की वृष राशि में सूर्य, चंद्र, बुध, और राहु यह चारों ग्रह एक साथ विराजमान रहेंगे वृष राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, जो दांपत्य जीवन और
सौंदर्यता के कारक माने जाते हैं। इन्हीं की राशि वृष में एक साथ चार ग्रहों का विराजमान होना किसी अद्भुत संयोग से कम नहीं है। दरअसल, चार ग्रह एक साथ में होना चतुर्ग्रही योग कहलाता है, और वृष राशि में चतुर्ग्रही योग का सँयोग सुहागिन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह योग सुहागिन महिलाओं के कई कष्टों का निवारण भी करेगा और दांपत्य जीवन में मिठास भी खोलेगा। इसलिए इस बार पर्व का महत्व कई गुना अधिक बढ़ गया है।

जानिए वटवृक्ष की पूजा महत्व

हिंदू शास्त्रों के अनुसार, वटवृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में शिव का वास माना गया है। वट वृक्ष यानी बरगद का पेड़ देव वृक्ष माना जाता है। देवी सावित्री भी इस वृक्ष में निवास करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति को पुन: जीवित किया था, तब से ये व्रत ‘वट सावित्री’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन विवाहित स्त्रियां अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए वटवृक्ष की पूजा करती हैं। वृक्ष की परिक्रमा करते समय इस पर 108 बार कच्चा सूत लपेटा जाता है। महिलाएं सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं।सावित्री की कथा सुनने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पति के संकट दूर होते हैं।

*शुभ मुहूर्त*

*व्रत तिथि* : 10 जून 2021 दिन गुरुवार
*अमावस्या प्रारंभ* : 9 जून 2021 को दोपहर 01:57 बजे
*अमावस्या समाप्त* : 10 जून 2021 को शाम 04:20 बजे
*व्रत पारण* : 11 जून 2021 दिन शुक्रवार

–वट सावित्री व्रत की पूजा विधि-

वट सावित्री व्रत के दिन सुबह उठकर स्नानादि करके व्रत का संकल्प लें। बांस की टोकरी में उपरोक्त पूजन सामग्री को लेकर वट वृक्ष नीचे जाएं। वहां वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की मूर्ति रखें। अब मूर्ति और वृक्ष पर जल चढ़ाकर सभी पूजन सामग्री अर्पित करें। अब कच्चे सूत के धागे या लाल कलावा से वृक्ष के चारों तरफ परिक्रमा करते हुए सात बार लपेटें। इसके बाद व्रत कथा सुनें या पढ़ें। शाम को घर पूजा करके प्रसाद बांटें। अगले दिन व्रत को तोड़ते हुए शुभ मुहूर्त में पारण करें।

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Author: cradmin

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