तालीम के बिना तरक्की मुश्किल: अहसन मियां

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बरेली |उर्स-ए-नूरी मुकम्मल होने के बाद आज ठिरिया निजावत खां में नूरी लंगर कमेटी व कंगी टोला में नूरी मेहमानखाने में टीटीएस की जानिब से जश्न-ए-मुफ्ती आज़म हिन्द दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) की सदारत में मनाया गया।

मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि कंगी टोला में अजमल नूरी व ठिरिया निजावत खां में हाजी रौनक अली खान व गौहर खान ने सज्जादानशीन का फूलों से जोरदार इस्तकबाल किया। सज्जादानशीन व तहरीक-ए-तहफ़्फ़ुज़ सुन्नियत (टीटीएस) के आलमी सदर मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने इस मौके पर मुसलमानों से आव्हान करते हुए कहा कि बच्चें हमारे मुल्क का मुस्तक़बिल (भविष्य) है। मुल्क की तरक्क़ी (विकास) के लिए तालीमयाफ्ता (शिक्षत) समाज का होना बेहद ज़रूरी है। तालीम के बिना तरक्की मुश्किल है। मुसलमान अपने बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अरबी, उर्दू के साथ इंग्लिश, हिंदी व अन्य भाषाए सिखाने पर भी ज़ोर दे।

दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम ज़रूर दिलाये। मुफ्ती, मौलवी, हाफिज़, कारी के साथ-साथ अपने बच्चों को आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर और डॉक्टर बनाये। हमारे नबी ने भी इल्म सीखने और सिखाने पर ज़ोर दिया। पढ़ा लिखा तबका ही मज़हब और मुल्क की सही तरक्की कर सकता है। यही मिशन आला हज़रत और मुफ्ती ए आज़म हिन्द का था। आला हज़रत ने जहाँ मंज़र-ए-इस्लाम की स्थापना की वहीं मुफ्ती आज़म हिंद ने मज़हर-ए-इस्लाम की। इन दोनों मदरसों से फारिग तलबा (छात्र) दुनिया भर में बरेली का नाम रोशन कर रहे है। बरेली की दुनिया भर में पहचान तालीम की ही बुनियाद पर है। इसके अलावा कारी अब्दुर्रहमान खां क़ादरी, मुफ्ती जमील, मौलाना बशीरुल क़ादरी मौलाना ताहिर हुसैन, हाफिज इल्यास ने भी ख़िताब किया। आखिर में फातिहा व दुआ के लंगर तकसीम किया गया।

इस मौके पर हाफिज अनवर,औररंगज़ेब नूरी,शाहिद नूरी, परवेज़ नूरी,ताहिर अल्वी,मंज़ूर खान, जावेद खान,शोएब अज़हरी,साकिब रज़ा,फ़ैज़ कुरैशी, जुनैद रज़ा चिश्ती, मेंहदी हसन, साकिब यार खान आदि लोग मौजूद रहे।

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Author: cradmin

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