बरेली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को बरेली में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया और अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के जिला प्रभारी आकाश उर्फ पप्पू गंगवार
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। उनका आरोप था कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

ज्ञापन में किसानों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को भी शामिल किया। संगठन ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने, अयोध्या श्रीराम मंदिर चंदा घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने, खाद की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने, मंडियों में किसानों के शोषण पर रोक लगाने तथा निजी खाद विक्रेताओं की निगरानी बढ़ाने की मांग की।
इसके अलावा बिजली आपूर्ति में सुधार, आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान, बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों का बकाया गन्ना भुगतान, जर्जर सड़कों की मरम्मत और भूमि अभिलेखों में त्रुटियों को ठीक कराने की मांग भी उठाई गई। किसान नेताओं ने किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।
जिला महासचिव चौधरी सतेंद्र सिंह ने कहा कि संगठन दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों और छात्राओं पर हुए कथित लाठीचार्ज का विरोध करता है। वहीं किसान नेता यामीन मलिक ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए किसानों और छात्रों के साथ खड़ी है।
प्रदर्शन के समापन पर संगठन ने चेतावनी दी कि यदि किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर और तेज किया जाएगा।



