बरेली। करीब 16 साल पुराने ध्वस्तीकरण आदेश पर आखिरकार गुरुवार को अमल हो गया। बरेली के प्रेमनगर क्षेत्र के सुर्खा स्थित कामधेनु गौशाला पर बीडीए ने बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त कर दिया। महामंडलेश्वर आचार्य संजीव गौड़ की इस गौशाला में कार्रवाई से पहले मौजूद सभी गोवंश को नगर निगम की गौशाला में स्थानांतरित कराया गया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण तरीके से ध्वस्तीकरण अभियान पूरा किया गया।

बीडीए सचिव हिमांशु गुप्ता के मुताबिक, निर्माण के खिलाफ वर्ष 2010 में ही ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हो चुका था। इस आदेश को अलग-अलग न्यायिक और प्रशासनिक मंचों पर चुनौती दी गई, लेकिन कहीं से भी राहत नहीं मिली।
2010 के आदेश पर 16 साल बाद अमल
मामला प्रेमनगर के सुर्खा इलाके में जीआरएम स्कूल के पीछे स्टेट बैंक कॉलोनी और रेलवे लाइन के पास स्थित कामधेनु गौशाला का है। गुरुवार सुबह बीडीए की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई से पहले आसपास के रास्तों पर आवाजाही नियंत्रित की गई और गौशाला में मौजूद गोवंश को सुरक्षित तरीके से नगर निगम की गौशाला भेजा गया। इसके बाद बुलडोजर की मदद से निर्माण गिराने की कार्रवाई शुरू हुई।
कमिश्नर कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई कानूनी लड़ाई
बीडीए सचिव हिमांशु गुप्ता ने बताया कि इस निर्माण के खिलाफ वर्ष 2010 में ध्वस्तीकरण का आदेश पारित हुआ था। इसके बाद आदेश को कमिश्नर न्यायालय, जिला न्यायालय और शासन स्तर पर चुनौती दी गई। मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन तमाम स्तरों पर कानूनी लड़ाई के बावजूद वर्ष 2010 का मूल आदेश बरकरार रहा।
सचिव के मुताबिक, गौशाला का कोई स्वीकृत नक्शा प्राधिकरण से पास नहीं कराया गया था। निर्माण पूरी तरह बिना नक्शे के किया गया था। पहले भी कई बार ध्वस्तीकरण के प्रयास हुए, लेकिन कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
अवमानना नोटिस के बाद तेज हुई कार्रवाई
हिमांशु गुप्ता ने बताया कि 13 नवंबर को अवमानना से संबंधित नोटिस भी प्राप्त हुआ था। न्यायालयों के आदेशों के बावजूद कार्रवाई पूरी नहीं होने के कारण अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई थी। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराना और अदालत में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करना जरूरी हो गया था। इसी वजह से गुरुवार को ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया।
डीएम के नामित मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई
बीडीए सचिव के अनुसार, जिलाधिकारी द्वारा नामित मजिस्ट्रेट, नगर निगम की टीम और पुलिस प्रशासन के सहयोग से पूरी कार्रवाई कराई गई। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान किसी तरह का विरोध या बाधा सामने नहीं आई। कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य रही और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
गोवंश को नगर निगम की गौशाला भेजा गया
कार्रवाई के दौरान गौशाला में मौजूद गोवंश को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई। सचिव हिमांशु गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सभी गोवंश को नगर निगम की गौशाला में स्थानांतरित कराया गया है। निर्माण गिराने से पहले परिसर को खाली कराया गया, ताकि पशुओं को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
तीसरी बार हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
बताया जा रहा है कि इस गौशाला पर बीडीए की ओर से पहले भी दो बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद निर्माण पूरी तरह नहीं हट पाया था। अब तीसरी बार प्राधिकरण ने न्यायालय के आदेश के अनुपालन में परिसर को ध्वस्त कराया है। बीडीए अधिकारियों के मुताबिक, परिसर में बने आवासीय निर्माण को लेकर भी आगे कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद शहर में गौशाला और अवैध निर्माण को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि बीडीए का कहना है कि यह कार्रवाई किसी गौशाला के संचालन के खिलाफ नहीं, बल्कि बिना स्वीकृत नक्शे के किए गए निर्माण और न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है।



