नई दिल्ली।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वैश्विक कंपनियां बिना कृषि बाजार के स्थायी बुनियादी ढांचे में निवेश किए, कृषि मूल्य-श्रृंखला के वित्त पोषण में योगदान दिए या किसानों के कल्याणकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लिए, केवल मुनाफा कमाने के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश चाह सकती हैं।
एसबीआई ने कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता और कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए रणनीतिक रुख बनाए रखना चाहिए। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका, मक्का, सोयाबीन, सेब, बादाम, एथेनॉल और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने की मांग कर रहा है, जबकि भारत फिलहाल इसके लिए राज़ी नहीं है।
भारत और अमेरिका के बीच इस माह के अंत में व्यापार वार्ता का अगला दौर होने वाला है, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के उत्तरार्ध में भारत पहुंचने की संभावना है। फिलहाल वार्ता अमेरिकी कृषि और डेयरी बाजार को भारतीय बाजार में व्यापक पहुंच देने की मांग पर अटकी हुई है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जिसमें 25 प्रतिशत शुल्क रूस से तेल खरीद जारी रखने पर दंड स्वरूप लगाया गया है।
एसबीआई का अनुमान है कि अगर भारत ने 2025-26 में रूस से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया, तो ईंधन आयात बिल में लगभग नौ अरब डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह बढ़ोतरी 11.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।




