
फतेहगंज पश्चिमी की रबर फैक्ट्री में रह रही बाघिन 15 महीने बाद भी वनविभाग के लिए सिरदर्द बनी है | बाघिन को पकड़ने के लिए कई बार अभियान चलाये गए ,लेकिन हर बार की तरह वह वनविभाग की पकड़ से दूर रही | कई बार विशेषज्ञ की टीम बुलाई गई उन पर लाखो रूपए खर्च किये गए लेकिन नतीजा जीरो रहा | मीडिया में छपी खबरों के अनुसार बाघिन को पकड़ने के लिए अब तक वनविभाग 60 लाख रूपए से अधिक खर्च कर चुका है | स्थानीय लोग बताते है बाघिन अब फैक्ट्री परिसर से बाहर निकलने लगी है | बाघिन ने मीरगंज थाना क्षेत्र के गांव हेमराजपुर में दो किसानों पर हमला कर दिया था जिसमे किसान गंभीर रूप से घायल हो गए थे | तब ग्रामीणों ने वनविभाग के प्रति नाराजगी जताई थी |

13 मार्च 2020 को पहली बार दिखी थी बाघिन
फैक्ट्री परिसर के आसपास में रहने वाले लोग बताते है कि बाघिन 13 मार्च 2020 को रबर फैक्ट्री के जंगल में फैक्ट्री के सुरक्षा कर्मियों ने देखी थी | मामले की जानकारी फैक्ट्री गार्डों द्वारा वनविभाग को दी गई लेकिन उनकी बात का विश्वास नहीं किया गया | बाद में शिकायत की सत्यता जांचने के लिए वनविभाग द्वारा फैक्ट्री परिसर में कैमरे लगाए गए जिसमे बाघिन कैद हुई है | इसके बाद बाघिन को पकड़ने के लिए कई प्रयास हुए | फैक्ट्री में पिंजरे लगाए गए , शिकार बांधा गया , लेकिन वनविभाग के सभी प्रयास नाकाफी साबित हुए | बताया यह भी जाता है बाघिन के रेस्क्यू के लिए हरबार 35 -40 लोगो की टीम पहुंचती है | अभियान चलाया जाता है | लाखो रूपए खर्च होते है | लेकिन टीम के हाथ में सफलता नहीं मिलती | स्थानीय रिपोर्टर बताते है कि बरेली में बाघिन को पकड़ने के लिए अब तक पांच रेस्क्यू चलाये गए | रेस्क्यू के फैक्ट्री में सीसीटीवी सेंसर , पिंजरा ,ट्रेंकुलाइज स्पेशल रूम , शिकार बांधने का काम किया गया | एक बार वनविभाग की टीम बाघिन को पकड़ने के पास पहुंच गई गई थी लेकिन लगातार बारिस ने वनविभाग के अभियान को ख़राब कर दिया | मीडिया में मुख्य वनसंरक्षक ललित कुमार वर्मा ने बताया है कि रबर फैक्ट्री में बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के प्रयास किये जा रहे है | कई टीमें अपना काम कर रही है | किसी टाइगर का रेस्क्यू पूरा करने के लिए व्यवस्थाएं करना पड़ती है | इस बार रणनीति के साथ रेस्क्यू को पूरा करने का प्रयास किया जायेगा |




