
पंकज गुप्ता
उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में रक्षाबंधन के मौके पर दो बहनों ने अपने भाई की जिंदगी बचाकर भाई को अनोखा उपहार दिया है | दरसल बदायूं के रहने वाले अक्षत वैश्य (14 ) लीवर की बीमारी से ग्रस्त है ऐसे में अक्षत की जिंदगी खतरे में थी लेकिन अक्षत की बहनों ने लीवर डोनर के रूप में आकर उस मिसाल को बदल दिया जिसमें कहा जाता है भाई बहनों की रक्षा के लिए सैदव तत्पर रहता है |
पेट की जाँच में अक्षत के लिवर इन्फेक्शन की हुई पुष्टि
बदायूं के रहने वाले राजेश कुमार गुप्ता के बेटे अक्षत वैश्य दसवीं क्लास में पढ़ते हैं | अचानक अक्षत के पेट में दर्द हुआ जिसके बाद कृष्णा को शहर के ही एक प्राइवेट क्लीनिक पर दिखाया गया । इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें बरेली के किसी बड़े अस्पताल में दिखाने की सलाह दी | बाद में परिजन बरेली अक्षत को लाये वहां पर टेस्टिंग में अक्षत के लिवर में इन्फेक्शन पाया गया परिजन परेशान होकर अक्षत को मेदांता हॉस्पिटल गुड़गांव ले जाया गया । जहां डॉक्टरों ने बच्चे का पूरा चेकअप करके बताया कि अक्षत का लीवर पूरी तरह से डैमेज हो चुका है । लीवर ट्रांसप्लांट के सिवा कोई उपाय है ।

अचानक आई विपदा में बहनों ने बेटों की निभाई जिम्मेदारी
अक्षत की छोटी बहन प्रेरणा ने परिजनों की समस्या को देखते हुए अपना लीवर अपने भाई अक्षत को डोनेट करने की बात कही । पहले परिवार ने इस बात को लेकर संकोच किया बाद में अक्षत की जिंदगी को बचाने के लिए लीवर डोनेट करने करने की बात स्वीकार कर ली | डॉक्टर को प्रेरणा की बात की जानकारी दी गई और इस बीच अक्षत का इलाज चलता रहा | हालाँकि डॉक्टरों के सामने लीवर ट्रांसप्लांट करने में समस्या यह भी थी कि अक्षत का बजन कुछ ज्यादा था । डॉक्टर ने परिवार को बताया की कृष्णा को दो डोनर की जरूरत पड़ेगी । यह जानकारी जब कृष्णा की बड़ी बहन नेहा को हुई । नेहा फ्लाइट पकड़कर इटली से इंडिया आ गई और उसने भी लीवर डोनेट करने की इच्छा जाहिर की | इसके बाद कृष्णा के ऑपरेशन की तैयारी की गई । कृष्णा का ऑपरेशन लगभग 18 घंटे चला । इस दौरान अक्षत की दोनों बहने नेहा और प्रेरणा को भी 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा । वही अक्षत 21 दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद जब डिसचार्ज हो गए |
गुप्ता फैमिली के लिए इस बार का रक्षाबंधन है कुछ खास
राजेश गुप्ता के परिवार के लिए इस बार का रक्षाबंधन पर रक्षाबंधन पहले से ज्यादा खास है क्यूंकि अक्षत की जिंदगी उसकी बहनों ने बचाकर उसे और उसके परिवार को अनमोल उपहार दिया है | वही अक्षत का कहना है कि वह अपनी बहनों को इस रक्षाबंधन पर क्या गिफ्ट दे उसकी बहनों ने उसे बड़ा गिफ्ट पहले से ही दे दिया है | अक्षत के पिता ने बताया कि उनकी बेटियों ने इस रक्षाबंधन पर ऐसा काम किया है जिसके बारे में कुछ भी कहना कम होगा |वह चाहते है कि हर परिवार में ऐसी बहन और ऐसा भाई ही हो। वही उन्हें लगता था कि उनकी बेटियों ने उन्हें अपने बेटा बनकर दिखा दिया है । जब बेटे की परेशानी बढ़ती जा रही थी तब मुझे कोई भी सूझबूझ नहीं थी छोटी बेटी प्रेरणा आगे आई और उसने सबसे पहले लिवर डोनेट करने की बात कही और उसके बाद जब डॉक्टरों ने एक लिवर डोनर मौजूद रहने की बात कही तो दूसरी बेटी भी इटली से इण्डिया आ गई | ऐसे बुरे हालात में बेटियों ने उनका खूब साथ दिया |
वही अक्षत की बहन नेहा का कहना है कि जब उसे अक्षत के बारे में पता लगा तो वह तुरंत इटली से फ्लाइट लेकर इंडिया आ गई लेकिन मेरी छोटी बहन प्रेरणा ने पहले से ही मन बना लिया था की वह अक्षत को लिवर डोनेट करूंगी अमूमन एक ही लीवर की जरूरत पड़ती है डोनेट करने के लिए लेकिन कृष्णा का वजन ज्यादा होने के कारण जब डॉक्टरों ने कहा कि 2 लोगों की जरूरत पड़ेगी तो हम लोग तुरंत टेस्टिंग के लिए तैयार हो गए सारी चीजें टेस्टिंग में सही मिली और हम अपने भाई को रक्षाबंधन से पूर्व यह गिफ्ट दे पाए यही हमारे लिए बहुत बड़ी बात है |




