
जानिए कब और कहां अदा की जाएगी है ईद उल अजहा की नमाज?
बरेली । ईद-उल-अज़हा पर शहर भर की सभी दरगाहों, प्रमुख खानकाहों व सभी छोटी- बड़ी मस्जिदों में कोविड 19 गाइड लाइन के अनुसार अपने-अपने वक़्तों पर 2 रकात वाजिब नमाज़ अदा होगी। इसी कड़ी में बाकरगंज स्थित ईदगाह में सुबह 10 बजे व किला स्थित जामा मस्जिद में 9 बजे नमाज़ होगी।
दरगाह आला हज़रत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि दरगाह स्थिति रज़ा मस्जिद में सबसे आखिर में सुबह 10.30 बजे नमाज़ होगी। आज दरगाह प्रमुख हज़रत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) व सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने सभी लोगों को ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद दी।
सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि जो साहिबे निसाब (शरई मालदार) मुसलमान है जिन पर कुर्बानी वाजिब है वो अल्लाह की रज़ा की खातिर कुर्बानी ज़रूर करें। कुर्बानी के लिए तीन दिन मुकर्रर है। हा पहले दिन कुर्बानी करना अफ़ज़ल है। शहरी इलाकों में ईद-उल-अज़हा की नमाज़ अदा करने के बाद कुर्बानी दे। देहात जहाँ ईद-उल-अज़हा की नमाज़ वाजिब नही वहाँ फ़ज़्र की नमाज़ के बाद कुर्बानी कर सकते है। इस मौके पर गरीबों का खास ख्याल रखे। साथ ही कुर्बानी सार्वजनिक स्थान या खुली जगह में न करे। किसी बन्द जगह में कुर्बानी करे और इसके अवशेष किसी गड्ढे में दफन कर दे। साफ सफाई का विशेष ध्यान रखे। रिश्तेदारों व गरीबों में जब गोश्त बाटने ले जाये तो उसे ढक कर ले जाये।
आल इंडिया तंजीम उलमा ए इस्लाम के महासचिव मौलाना
शहाबुद्दीन रज़वी ने की यह खास अपील
आल इंडिया तंजीम उलमा ए इस्लाम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि बकराईद का दिन अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी करना है कुर्बानी का खून व और दूसरी चीजों को इधरउधर न फेंका जाये बल्कि कुर्बानी के खुन को और जानवरों की हड्डीयां को इकट्ठा करके मिट्टी में गाड देना सुन्नत हैं ताकि किसी को भी तकलीफ न हो.
मौलाना ने आगे कहा कि कोरोना गाईड लाईन का पालन करे, ईद की नमाजों में कोरोना जैसी मोहलिक बीमारी के खातमे के लिए दुआ करे, और अपने घरों में रहे भीड़ भाड़ वाली जगहों से जानें से बचें, मौलाना ने सबको बकराईद की मुबारक बाद दी और देश की खुशहाली के लिए दुआ की.




