बरेली। लंबे समय से प्रदूषण और उपेक्षा की मार झेल रही नकटिया नदी के दिन अब बदलने की उम्मीद जगी है। नदी के पुनर्जीवन को लेकर बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड ने पहल शुरू की है। कैंटोनमेंट बोर्ड की CEO डॉ. तनु जैन
जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से हुई बैठक
नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन की संभावनाओं को लेकर डॉ. तनु जैन ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की है। इसमें नदी की वर्तमान स्थिति, जल संरक्षण और उसके प्राकृतिक स्वरूप को बेहतर बनाने से जुड़े बिंदुओं पर विचार किया गया। योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए विभागीय स्तर पर समन्वय बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

पर्यावरण मंत्री से भी हुई बातचीत
नकटिया नदी के पुनर्जीवन की योजना को व्यापक स्वरूप देने के लिए CEO डॉ. तनु जैन ने उत्तर प्रदेश सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना से भी बातचीत की है। शासन स्तर से सहयोग मिलने पर नदी संरक्षण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
21 अगस्त को होगा विशेष पर्यावरण कार्यक्रम
कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से 21 अगस्त 2026 को सुबह नौ बजे विशेष पर्यावरणीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार सक्सेना को आमंत्रित किया गया है। इस दौरान व्यापक पौधरोपण अभियान के साथ नकटिया नदी के पुनर्जीवन से जुड़ी प्रस्तावित पहलों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

सफाई, हरियाली और जल संरक्षण पर फोकस
नकटिया नदी के प्रस्तावित पुनर्जीवन कार्यक्रम में नदी की सफाई, जल संरक्षण, तटवर्ती हरित क्षेत्र का विकास, वृक्षारोपण और जैव-विविधता संरक्षण को प्रमुखता दी जाएगी। उद्देश्य नदी के आसपास के पर्यावरण को बेहतर बनाने के साथ उसकी पारिस्थितिकी को भी मजबूत करना है।
डॉ. तनु जैन के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण का मकसद केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी प्राकृतिक संसाधन तैयार करना है, जिनका लाभ वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी मिल सके। नकटिया नदी के पुनर्जीवन की यह पहल सफल होती है तो बरेली में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
किला नदी को भी पुनर्जीवन की दरकार, प्रदूषण और अतिक्रमण से अस्तित्व पर संकट
उत्तराखंड से बरेली तक का सफर तय करने वाली किला नदी इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रही है। नदी का पानी कई स्थानों पर बुरी तरह प्रदूषित होने की वजह से इसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कभी क्षेत्र के जल और पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यह नदी अब गंदगी, प्रदूषण और अतिक्रमण जैसी समस्याओं से जूझ रही है।
किला नदी की जमीन पर कई स्थानों पर अवैध कब्जों की शिकायतें सामने आती रही हैं। नदी क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ने से उसके प्राकृतिक स्वरूप और जल प्रवाह पर भी असर पड़ने की आशंका है। इसके अलावा प्रदूषण के कारण नदी का पानी उपयोग के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
नदी की लगातार बिगड़ती स्थिति के बावजूद इसके संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर प्रभावी पहल की जरूरत महसूस की जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के स्तर से भी समय-समय पर नदियों को बचाने की जरूरत उठती रही है।
ऐसे में किला नदी के लिए भी सफाई, प्रदूषण नियंत्रण, अतिक्रमण की जांच और नदी क्षेत्र के संरक्षण को लेकर ठोस कार्ययोजना की जरूरत है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो नदी का प्राकृतिक अस्तित्व और पारिस्थितिक महत्व और अधिक प्रभावित हो सकता है।



