बरेली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत संचालित केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई), इज्जतनगर में सोमवार, दो नवंबर 2026 को 48वां स्थापना दिवस समारोह मनाया जाएगा। इस मौके पर विराट कुक्कुट मेला और कुक्कुट कृषक संगोष्ठी आयोजित होगी। कार्यक्रम की थीम ‘कुक्कुट नवाचार प्रौद्योगिकियों से आत्मनिर्भर भारत रखी गई है।

संस्थान के निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने बताया कि मेले का उद्देश्य किसानों तक मुर्गी पालन से जुड़ी नई तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारियों को पहुंचाना है। मेले में 50 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें विभिन्न कंपनियां और विभाग अपने उत्पादों और तकनीकों की जानकारी देंगे। अलग-अलग प्रजातियों के जीवित पक्षियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके साथ ही 25 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधि वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करेंगे।
देसी मुर्गियों की नस्ल सुधार पर काम
संस्थान देसी मुर्गियों की नस्ल सुधार और उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। लक्ष्य है कि कम समय और कम खर्च में अधिक अंडे और बेहतर वजन प्राप्त किया जा सके। संस्थान के अनुसार, वर्ष 2030 तक एक पक्षी से सालाना 113.63 अंडे और 20 सप्ताह की उम्र में 1.5 किलोग्राम वजन हासिल करने का लक्ष्य है। वहीं विकसित भारत 2047 के तहत सालाना 140.35 अंडे और 17 सप्ताह में 1.5 किलोग्राम वजन प्राप्त करने की परिकल्पना की गई है।
किसानों और युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
संस्थान की ओर से मुर्गी पालन, लेयर और ब्रॉयलर फार्मिंग, जापानी बटेर पालन, बत्तख पालन और पशु आहार की गुणवत्ता से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। किसानों, महिलाओं और युवाओं को फार्म खोलने, आर्थिक प्रबंधन, उत्पादन और बाजार में उत्पाद बेचने की जानकारी भी दी जाती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।
डॉ. सुमंत व्यास होंगे मुख्य अतिथि
स्थापना दिवस समारोह में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति डॉ. सुमंत व्यास मुख्य अतिथि होंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (पशु उत्पादन एवं प्रजनन) डॉ. एचके नरूला विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी करेंगे। आयोजन की शुरुआत सुबह नौ बजे पंजीकरण और किसान संगोष्ठी से होगी।
1979 से कुक्कुट अनुसंधान में जुटा है संस्थान
वर्ष 1979 में स्थापित केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान मुर्गी, जापानी बटेर, गिनी फाउल, टर्की और बत्तख जैसी पक्षी प्रजातियों पर अनुसंधान कर रहा है। संस्थान ने करीब 40 उन्नत जर्मप्लाज्म लाइनों, किस्मों और क्रॉस के विकास में योगदान दिया है। वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए पक्षियों की नस्ल और उत्पादन क्षमता में सुधार किया जा रहा है। संस्थान का प्रयास है कि इन तकनीकों का लाभ किसानों तक पहुंचे और मुर्गी पालन उनकी आमदनी बढ़ाने का बेहतर माध्यम बने।



