बरेली। शहर में पड़ रही भीषण गर्मी और 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच मिनी बाईपास पर कुछ परिवार खुले आसमान के नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। आग उगलते सूरज और तपती सड़क के बीच एक बेरी का पेड़ ही इन लोगों का सहारा बना हुआ है।मिनी बाईपास किनारे पिछले करीब छह महीनों से पांच सदस्यीय परिवार सड़क किनारे रह रहा है। परिवार सुबह-शाम चूल्हे पर खाना बनाता है और दिन में मजदूरी कर किसी तरह गुजर-बसर करता है। रात होते ही यही सड़क किनारा उनका घर बन जाता है।

परिवार के मुखिया मुन्ना लाल मौर्य बताते हैं कि बहन की शादी के लिए लिया गया कर्ज उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया। रुपये वापस न कर पाने पर उनका घर और जमीन छिन गई। इसके बाद परिवार बेघर हो गया और कई जगह भटकने के बाद मिनी बाईपास पर बेरी के पेड़ के नीचे रहने लगा।मुन्ना लाल के परिवार में उनकी पत्नी, मां, पंजाब से आए चाचा और एक छोटा बच्चा शामिल है। उनका कहना है कि गर्मी के दिनों में दिन काटना मुश्किल हो जाता है। तेज धूप से बचने के लिए परिवार पेड़ों की छांव तलाशता रहता है।

इसी जगह से कुछ दूरी पर रामपुर रोड किनारे रहने वाली शबीना पत्नी इकराम ने बताया कि उनके पास भी रहने के लिए कोई घर नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे रहना उनकी मजबूरी है। शबीना का दावा है कि ठंड के दौरान उनके एक बच्चे की ठंड लगने से मौत हो गई थी। उन्हें यह भी जानकारी नहीं कि सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लिया जाए।मिनी बाईपास किनारे ही एक बुजुर्ग महिला भी झोपड़ी डालकर रह रही हैं।वह बोल नहीं पातीं। आसपास के लोगों के मुताबिक परिवार वाले कभी-कभी उन्हें देखने आते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।
मामले पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि प्रशासन इस विषय को गंभीरता से ले रहा है। नगर निगम के सहयोग से ऐसे जरूरतमंद लोगों को रैन बसेरों और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति सड़क पर रहने को मजबूर न हो।




