बरेली। पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं हैं, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाला हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस के मंडलाध्यक्ष मुख्तार अहमद ने ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा कि यह टकराव अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि युद्ध इसी तरह से और बड़ा तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया, खासकर भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ेगा।
संगठन का स्पष्ट मत है कि किसी भी देश की संप्रभुता और आत्मसम्मान पर बाहरी दबाव या सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा है। मजलिस का मानना है कि ईरान के खिलाफ बढ़ता सैन्य और राजनीतिक दबाव क्षेत्र में अस्थिरता को और और बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ेगा।
मुख्तार अहमद ने कहा कि दुनिया इस समय वैश्विक ताकतों के पुनर्संतुलन के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में किसी एक देश की दादागीरी या एकतरफा वर्चस्व अधिक समय तक कायम नहीं रह सकता। इतिहास गवाह है कि आक्रामक और अन्यायपूर्ण नीतियां अंततः टिकाऊ साबित नहीं होतीं।
ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि युद्ध की बजाय संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में समाधान तलाशा जाए। संगठन ने कहा कि किसी भी संघर्ष में निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
मजलिस का मानना है कि विश्व शांति, न्याय और संतुलित वैश्विक व्यवस्था ही स्थायी समाधान का मार्ग है, और यही समय की सबसे बड़ी जरूरत भी है।



