बरेली। मोहर्रम का महीना शुरू होते ही जिले भर में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शहर और देहात के इमामबाड़ों में रंग-रोगन, साफ-सफाई और सजावट का काम लगभग पूरा हो चुका है। कई स्थानों पर ताजियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जबकि मोहर्रम की पहली तारीख से मजलिसों और धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। आगामी 26 जून को आशूरा मनाया जाएगा, जिसे लेकर अकीदतमंदों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।

मोहर्रम को लेकर बरेली के विभिन्न इलाकों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ताजियादार अपने-अपने ताजियों को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं। इमामबाड़ों में रात तक काम चल रहा है और धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। शहर के कई प्रमुख इमामबाड़ों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर तैयारियों का जायजा ले रहे हैं।
उधर प्रशासन भी मोहर्रम को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सेंट्रल पीस कमेटी की बैठक में सुरक्षा, कानून व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि ताजियों की ऊंचाई 12 फीट से अधिक नहीं होगी और जुलूस केवल परंपरागत मार्गों से ही निकाले जाएंगे। साथ ही बिजली विभाग, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि मोहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ मनाया जाए। उन्होंने बताया कि सभी थानों और तहसीलों में पीस कमेटी की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं तथा प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार जुलूस मार्गों का निरीक्षण कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के पालन में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और सभी व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्षों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी और पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती की जाएगी। अधिकारियों ने जिलेवासियों से गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को बनाए रखते हुए आपसी सद्भाव और सहयोग के साथ मोहर्रम मनाने की अपील की है।




