मां के हौसले ने बदली बेटियों की दुनिया, मूक-बधिर रिदम शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया देश का मान

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बरेली। मदर्स डे के मौके पर पूनम शर्मा की कहानी उन लाखों माताओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए हर चुनौती से लड़ जाती हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूनम ने अपनी दोनों मूक-बधिर बेटियों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनकी मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि आज एक बेटी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि दूसरी बेटी रिदम शर्मा खेल जगत में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

 

सोर्स। एआई जनरेटिड

पूनम शर्मा बताती हैं कि जब उन्हें पता चला कि उनकी दोनों बेटियां सुन और बोल नहीं सकतीं, तब परिवार पूरी तरह टूट गया था। कई डॉक्टरों से इलाज कराया गया, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने हालात से समझौता करने के बजाय बेटियों की क्षमताओं को पहचानने का फैसला किया।

 

उन्होंने अपनी दिनचर्या पूरी तरह बच्चों के अनुसार बदल दी। रोज सुबह जल्दी उठना, बच्चों की देखभाल करना, उनकी पढ़ाई और अभ्यास पर ध्यान देना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। पूनम ने इशारों की भाषा सीखकर बेटियों से संवाद करना शुरू किया, ताकि वे उनकी हर जरूरत और भावना को समझ सकें।

सोर्स। न्यूजवोक्सइंडिया.कॉम

रिदम बचपन से ही खेलों की ओर आकर्षित थीं। टीवी पर एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं देखकर वह काफी उत्साहित होती थीं। बेटी की रुचि को समझते हुए पूनम ने वर्ष 2015 में उसे स्टेडियम भेजना शुरू किया। वहां कोच अजय कश्यप के मार्गदर्शन में रिदम ने प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित करना शुरू कर दिया।

मदर्स डे पर पूनम शर्मा और उनकी बेटी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रिदम शर्मा की प्रेरणादायक कहानी

रिदम ने 100, 200 और 400 मीटर दौड़ में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते हैं। वर्ष 2024 में मलेशिया में आयोजित डेफ एशिया पैसिफिक गेम्स में उन्होंने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। वहीं मार्च 2026 में अहमदाबाद में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और तीन रजत पदक अपने नाम किए।

रिदम की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें प्रदेश स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। पूनम शर्मा का कहना है कि अगर दिव्यांग खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
पूनम की कहानी यह संदेश देती है कि मां का हौसला और भरोसा बच्चों की जिंदगी बदल सकता है। अगर परिवार साथ खड़ा हो, तो किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है।

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Author: newsvoxindia

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