बरेली।जिला कांग्रेस पार्टी की ओर से जिलाध्यक्ष असफाक सक्लेनी के नेतृत्व में “मनरेगा बचाओ संवाद चौपाल” कार्यक्रम का आयोजन ब्लॉक भादपुरा के बहुआ बाज़ार, बड़ा गाँव एवं नकटी नारायणपुर में किया गया। इस चौपाल के माध्यम से कांग्रेस ने ग्रामीण जनता की समस्याओं को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और मनरेगा सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की बदहाली पर सवाल उठाए।
चौपाल को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष असफाक सक्लेनी ने कहा कि भाजपा सरकार मूल मुद्दों से ध्यान भटकाकर जनता को इधर-उधर के गैर जरूरी कार्यों में उलझा रही है। उन्होंने कहा कि इससे आम जनता, खासकर गरीब और ग्रामीण वर्ग का कोई भला नहीं होने वाला। सक्लेनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनरेगा जैसी गरीबों की जीवनरेखा योजना का नाम बदल देने मात्र से मजदूरों का पेट नहीं भर सकता और न ही उनके घरों में खुशहाली आ सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण श्रमिकों के साथ अन्याय कर रही है। मनरेगा के तहत काम कर चुके मजदूरों का भुगतान वर्षों से लंबित है, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए है। यदि सरकार वास्तव में गरीब और ग्रामीण जनता का हित चाहती है तो सबसे पहले इन मजदूरों का बकाया भुगतान तुरंत जारी करे।
जिलाध्यक्ष ने आशा कार्यकर्ताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आशा बहनें पिछले कई दिनों से अपने मानदेय को लेकर धरने पर बैठी हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार आशा कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनका लंबित भुगतान तत्काल सुनिश्चित करे। इसके साथ ही रोजगार सेवकों सहित अन्य संविदा एवं मानदेय आधारित कर्मियों का भी लंबे समय से रुका हुआ भुगतान शीघ्र जारी किया जाए।
असफाक सक्लेनी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भाजपा सरकार अपनी तानाशाही और जनविरोधी नीतियों को नहीं छोड़ती है तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और आवश्यकता पड़ी तो जेल भरो आंदोलन भी चलाया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन पंडित राज शर्मा ने किया।
इस अवसर पर प्रवक्ता पंडित राज शर्मा, कमरुद्दीन सेफी, भदगवा ब्लॉक अध्यक्ष इरशाद मंसूरी, जिला सचिव सतीश सैनी, सुधीर रस्तोगी, दीक्षा गंगवार, शाहरुख, दाताराम, उमेश गंगवार, अशोक सागर (नाज़िम मेंबर), प्रेमपाल मौर्य, मनोहर लाल, झम्मन लाल, राम अवतार, हेमराज सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।


