यूपी के बरेली में प्रशासनिक महकमे में उस समय हलचल मच गई जब सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा देने की सूचना सामने आई। इस खबर के फैलते ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया और मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया। लोग उनके सरकारी आवास पर जुटने लगे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

जानकारी के अनुसार सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से यूजीसी एक्ट से जुड़े मुद्दों पर असहमति जताई थी। बताया जा रहा है कि वे कुछ नीतिगत निर्णयों से संतुष्ट नहीं थे। वह भाजपा सरकार पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा पर हमलावर है।साथ ही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सिटी मजिस्ट्रेट असहज और असंतुष्ट थे।

इन्हीं विभिन्न घटनाक्रमों के बाद उनके इस्तीफा देने की खबर सामने आई। बाद में खुद सिटी मजिस्ट्रेट ने मीडिया से बात करते हुए यूजीसी और शंकराचार्य के अपमान की बात कहते हुए इस्तीफा देने की बात को स्वीकारा।हालांकि फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस्तीफे की सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट के आवास पर लोगों का जमावड़ा लगने लगा। ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई प्रशासनिक अधिकारी भी उनसे मुलाकात करने पहुंचे और स्थिति की जानकारी लेने के साथ समर्थन जताने का प्रयास किया। ब्राह्मण समाज के लोगों ने आक्रोश जताते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सिटी मजिस्ट्रेट से मिलने वालों में मेयर उमेश गौतम , पूर्व बिथरी विधायक मौजूद रहे।
बताया जा रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से कानपुर के निवासी हैं और उन्होंने बीएचयू से आईटी के क्षेत्र में पढ़ाई की है।सिविल सेवा में आने से पहले वे एक प्रतिष्ठित क्षेत्र में कार्यरत थे, जहां उन्हें लगभग 1 लाख रुपये वेतन प्रतिमाह मिलता था। उनकी नौकरी का करीब 17 साल का कार्यकाल अभी बचा है।
इसके बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा को चुना, जिसे उनके करीबी एक साहसिक निर्णय मानते हैं।फिलहाल पूरा घटनाक्रम जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें प्रशासन की ओर से आने वाले आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मामले की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।



