किसानों को चाहिए अधिकृत जमीन के बदले मूलभूत सुविधाएं

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बरेली-बदायूं हाईवे चौड़ीकरण से बढ़ी किसानों की परेशानी, डीएम को सौंपा गया ज्ञापन

बरेली-बदायूं राष्ट्रीय राजमार्ग के छह-लेन चौड़ीकरण कार्य से प्रभावित किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की है। किसान एकता संघ के नेतृत्व में किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में जिला अधिकारी को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। किसानों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन ली जा रही है, लेकिन बदले में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जा रहीं।

ज्ञापन में किसानों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग कोहनी प्रतापपुर गांव (थाना भमोरा) के पास अंडरपास निर्माण की है। हाईवे बनने से किसानों के खेत दो हिस्सों में बंट गए हैं, जिससे खेतों तक सुरक्षित पहुंच में भारी दिक्कत हो रही है। दूसरी मांग चौड़ीकरण की जद में आ रहे प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण को लेकर है। किसानों ने मंदिर को ध्वस्त होने से बचाने और उसके आसपास फैली निर्माण सामग्री हटाकर सौंदर्य बनाए रखने की मांग की है।

तीसरी अहम मांग रामगंगा पार के गांवों की अधिग्रहित भूमि को लेकर है। किसानों ने मांग की है कि बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित जमीन के बदले उन्हें 10 प्रतिशत विकसित प्लॉट दिए जाएं, साथ ही अधिग्रहित क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

किसान एकता संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. रवि नागर ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि प्रशासन ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

 

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Author: newsvoxindia

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