बरेली कलेक्ट्रेट: 253 वर्षों से प्रशासन और जनता के भरोसे का केंद्र

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बरेली का ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट परिसर पिछले 253 वर्षों से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ब्रिटिश शासनकाल में स्थापित यह भवन आज भी प्रशासनिक गतिविधियों, जनसुनवाई और सरकारी योजनाओं के संचालन का मुख्य आधार माना जाता है। समय के साथ प्रशासनिक व्यवस्थाएं बदलती रहीं, लेकिन कलेक्ट्रेट की अहमियत लगातार बरकरार रही।

फोटो में प्राचीन कलेक्ट्रेट बिल्डिंग

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि वर्ष 1772 में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा भारत में जिलाधिकारी व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। इसके बाद बरेली में भी प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कलेक्ट्रेट व्यवस्था विकसित की गई। ब्रिटिश दौर में इसी भवन से जिले की कानून व्यवस्था, राजस्व और शासन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य संचालित किए जाते थे। आम जनता अपनी शिकायतों और समस्याओं को लेकर यहां पहुंचती थी, जहां उनकी सुनवाई की जाती थी।

आजादी के बाद भी कलेक्ट्रेट परिसर प्रशासनिक व्यवस्था की धुरी बना रहा। जिले में विकास योजनाओं की निगरानी, जनहित से जुड़े फैसले और शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में इस भवन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्षों के दौरान कई अनुभवी अधिकारियों ने यहां जिला मजिस्ट्रेट और जिलाधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में अविनाश सिंह जिले के जिलाधिकारी के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सियासी मंच के प्रमुख वसीम मियां का कहना है कि कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करते ही ब्रिटिश काल की प्रशासनिक व्यवस्था की झलक महसूस होती है। उनके अनुसार अंग्रेजों के समय की कई व्यवस्थाएं आज भी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बनी हुई हैं।

वहीं जनार्दन आचार्य ने बताया कि शहर में कोतवाली, बिहारीपुर चौकी, बरेली कॉलेज और कलेक्ट्रेट जैसी कई ऐतिहासिक इमारतें आज भी विरासत के रूप में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इन भवनों ने समाज, शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

एंग्लो-इंडियन वास्तुकला में निर्मित बरेली कलेक्ट्रेट आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान, भव्य संरचना और प्रशासनिक गरिमा के लिए जाना जाता है। सदियों पुरानी यह इमारत आज भी जनता और प्रशासन के बीच भरोसे की मजबूत कड़ी बनी हुई है।

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Author: newsvoxindia

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