बरेली। जिले में शुक्रवार को उस वक्त अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया जब शाम ठीक 6 बजकर 15 मिनट पर अचानक तेज सायरनों की गूंज सुनाई दी। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में सिविल डिफेंस बरेली की ओर से एक व्यापक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसने कुछ पलों के लिए पूरे क्षेत्र को युद्धकालीन स्थिति जैसा बना दिया।

सायरन बजते ही कलेक्ट्रेट परिसर की सभी आंतरिक और बाहरी लाइटें बंद कर दी गईं, जिससे अंधेरा छा गया। इसके बाद हवाई हमले और बम धमाकों जैसे साउंड इफेक्ट चलाए गए, ताकि आपात स्थिति का वास्तविक अनुभव कराया जा सके। अचानक बदले इस माहौल में कुछ देर के लिए लोगों की सांसें थमी रहीं और पूरा इलाका हाई अलर्ट पर नजर आया।
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मॉक ड्रिल के दौरान कई स्थानों पर आग लगने जैसी कृत्रिम परिस्थितियां बनाई गईं। सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित वार्डनों और स्वयंसेवकों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए फायर फाइटिंग उपकरणों की मदद से आग बुझाने का अभ्यास किया। साथ ही घरेलू आग यानी डोमेस्टिक फायर की स्थिति भी दर्शाई गई और बताया गया कि किसी विस्फोट या हमले के बाद राहत एवं बचाव कार्य किस तरह तेजी से और सुरक्षित तरीके से किया जाना चाहिए।

इस अभ्यास का उद्देश्य युद्ध, हवाई हमले या किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों और प्रशासन की तैयारियों को परखना और उन्हें और अधिक मजबूत करना रहा। मॉक ड्रिल के दौरान लोगों से शांत रहने और निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई।
कार्यक्रम के दौरान प्रदेश सरकार के वन मंत्री डॉक्टर अरुण सक्सेना, जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एसपी सिटी मानुष पारिक सहित प्रशासन और पुलिस के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।




