बहेड़ी।
लेखपाल संघ का कहना है कि कई मामलों में शिकायत की सच्चाई, शिकायतकर्ता की मंशा और संबंधित लेखपाल की भूमिका की पर्याप्त जांच किए बिना ही कार्रवाई कर दी जाती है। इससे कर्मचारियों में डर का माहौल बन रहा है और वे अपने काम को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
संघ ने अयोध्या की सोहावल तहसील में 20 अगस्त को लेखपाल उत्कर्षदीप के खिलाफ हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन के अनुसार, मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, शिकायत और ट्रैप से पहले की गई प्रक्रिया समेत सभी तथ्यों की जांच स्वतंत्र एजेंसी या एसआईटी से कराई जानी चाहिए।
लेखपाल संघ ने मांग की है कि भविष्य में किसी कर्मचारी के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई करने से पहले शिकायत की सत्यता की विस्तृत जांच की जाए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता की पृष्ठभूमि, निजी रंजिश और शिकायत के पीछे की मंशा को भी जांच का हिस्सा बनाया जाए। संघ ने केवल मौखिक शिकायत के आधार पर ट्रैप कार्रवाई नहीं करने की मांग की है।
संगठन ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन और विजिलेंस विभाग की कार्रवाई के लिए स्पष्ट और पारदर्शी एसओपी बनाए जाने की मांग भी की है। संघ का कहना है कि इससे वास्तविक भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ निर्दोष कर्मचारियों को झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से बचाया जा सकेगा।
लेखपाल संघ ने कहा कि लेखपाल गांव स्तर पर राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। भूमि विवाद, पैमाइश, अतिक्रमण और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों में उनकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में लगातार ट्रैप कार्रवाई के डर से कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है।
संघ ने अयोध्या के मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और यदि संबंधित लेखपाल निर्दोष पाए जाते हैं तो उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि पारदर्शी जांच और उचित प्रक्रिया के बिना की जाने वाली कार्रवाई का विरोध आगे भी जारी रहेगा।



