बरेली। इज्जतनगर स्थित केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान में सोमवार को 48वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर विराट कुक्कुट मेले का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों और कुक्कुट पालकों की भीड़ उमड़ी। मेले में 50 से अधिक स्टॉल लगाए गए। यहां एमू के अंडे, एग पेड़ा, एग बिस्कुट, चकली, चिकन बाइट और सीक कबाब जैसे उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। देश के अलग-अलग हिस्सों से वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी पहुंचे। बच्चों और परिवारों ने भी मेले में पहुंचकर विभिन्न स्टॉलों का आनंद लिया और नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की।

मेले में कुक्कुट पालन, अंडा उत्पादन, हैचरी, पशुपालन और कृषि से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। खास बात यह रही कि अंडे और चिकन से तैयार किए गए नए खाद्य उत्पादों ने लोगों को खासा आकर्षित किया। इन उत्पादों के जरिए बताया गया कि मुर्गी पालन को केवल अंडे और चिकन की बिक्री तक सीमित रखने के बजाय उनसे कई तरह के प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ तैयार कर कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति डॉ. सुमंत व्यास रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आईसीएआर के सहायक महानिदेशक डॉ. एचके नरूला, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. एसके सिंह, ईडब्ल्यू न्यूट्रिशन दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक डॉ. शिरीष निगम और जनता फूड्स एंड हैचरीज के प्रबंध निदेशक मोहित मलिक मौजूद रहे। संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने अतिथियों का स्वागत किया।

इस दौरान प्रगतिशील कुक्कुट उद्यमियों अब्बास रिजवी, सैयद फैज अहमद चिश्ती और वशिष्ठ राव को कुक्कुट पालन एवं हैचरी व्यवसाय में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार शंकर दास को पत्रकारिता के क्षेत्र में दीर्घकालीन योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। अनुसूचित जाति एवं जनजाति उपयोजना के तहत स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाले लाभार्थियों को भी सम्मानित किया गया।

समारोह में संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। संस्थान की ओर से विकसित सीमन डाइल्यूएंट तकनीक का राठी हैचरीज़ को 10 लाख रुपये में हस्तांतरण किया गया। इसके साथ ही मशरूम उत्पादन, हिंदी स्मारिका-2026 और जैव प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिक कुक्कुट उत्पादन पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन हुआ।
वैल्यू एडिशन से पांच गुना तक बढ़ सकती है किसानों की कमाई
संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगबीर सिंह त्यागी ने कहा कि किसानों को केवल मुर्गा और अंडा बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनसे नए उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचने चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि किसान सीधे मुर्गा बेचता है तो उसे करीब 100 रुपये मिलते हैं, लेकिन उसी उत्पाद का वैल्यू एडिशन कर प्रसंस्कृत रूप में बाजार में उतारा जाए तो उसकी कीमत 500 रुपये तक पहुंच सकती है। इससे किसानों की कमाई पांच गुना तक बढ़ सकती है।
उन्होंने बताया कि बच्चों और युवाओं की पसंद को देखते हुए एग पेड़ा, एग बिस्कुट और चकली जैसे उत्पाद तैयार किए गए हैं। वहीं, जिम जाने वाले युवाओं के लिए 100 मिलीलीटर की विशेष प्रोटीन ड्रिंक बनाई गई है, जिसमें 10 से 12 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध है। डॉ. त्यागी ने कहा कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले अपशिष्ट से जैविक खाद तैयार की जा रही है, जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। संस्थान एससी-एसटी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की विशेष परियोजनाओं के तहत गांवों में वैज्ञानिकों को भेजकर किसानों और बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण दे रहा है, ताकि वे आधुनिक तकनीक अपनाकर स्वरोजगार शुरू कर सकें।



