तुलसी मठ में विधि-विधान से हुई शस्त्र पूजा, दशहरे पर निभाई गई वर्षों पुरानी परंपरा

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बरेली। विजयादशमी के अवसर पर बरेली के तुलसी मठ में वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए विधि-विधान से अस्त्र-शस्त्र पूजन किया गया। अलखनाथ मंदिर के पास स्थित इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल पर पूजा-अर्चना के साथ धर्म की विजय, विश्व कल्याण और समाज में सद्भाव की कामना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान का स्मरण कर सदाचार अपनाने और जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लिया।

सोर्स।एआई

 

तुलसी मठ में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा शक्ति और भक्ति के समन्वय का प्रतीक मानी जाती है। यह आयोजन बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के संदेश को भी रेखांकित करता है। मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस स्थान पर रहकर तपस्या की थी। रामानंदी वैष्णव परंपरा से जुड़े इस स्थल पर विजयादशमी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
नीरज नयन दास ने बताया कि विजयादशमी का पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय की प्रेरणा देता है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका प्रस्थान से पहले भगवान शिव और सूर्य देव का पूजन किया था। इसके बाद उन्होंने अधर्म के विरुद्ध विजय प्राप्त की।

सोर्स। न्यूज वॉक्स

उन्होंने कहा कि दशहरे पर दिव्य अस्त्रों का स्मरण, यज्ञ और पूजा-अर्चना करने का उद्देश्य लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने तथा जीवन में सदाचार अपनाने के लिए प्रेरित करना है। भगवान सूर्य, विष्णु, शिव, हनुमान जी और मां दुर्गा का स्मरण कर विश्व कल्याण की कामना की जाती है।
नीरज नयन दास ने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व समाज में सेवा, सद्भाव और अच्छाई की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से धर्म के मार्ग पर चलने और दूसरों की सहायता करने का आह्वान किया।

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Author: newsvoxindia

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