बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आस्था का एक ऐसा अद्भुत केंद्र स्थित है, जहां भगवान हनुमान की दुर्लभ शयन मुद्रा में प्रतिमा विराजमान है। रामगंगा नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि मंगलवार और शनिवार को मंदिर परिसर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार रहता है।
मान्यता है कि यह वही पवित्र स्थान है, जहां भगवान हनुमान संजीवनी बूटी लाते समय विश्राम के लिए रुके थे। पौराणिक कथा के अनुसार, जब लंका युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने हिमालय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान भगवान राम के भाई भरत ने उन्हें आकाश में देखकर शत्रु समझ लिया और तीर चला दिया। तीर लगने के बाद हनुमान जी जिस स्थान पर विश्राम के लिए रुके, वही स्थान आज लेटे हुए हनुमान जी के मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है।
बताया जाता है कि वर्षों पहले यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था और यहां पहुंचना बेहद कठिन माना जाता था। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई और यह स्थल बरेली के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल हो गया। आज यहां दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।
मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना के साथ भंडारे और लंगर का आयोजन भी किया जाता है, जिससे पूरा परिसर भक्ति और सेवा के रंग में रंग जाता है।मंदिर के पुजारी सोबरन दास बताते हैं कि यह स्थल अत्यंत चमत्कारी और पवित्र माना जाता है। उनका कहना है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक सुकून महसूस होता है।
मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इसके जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक शांति का संगम बना यह मंदिर आज बरेली की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।




