बरेली। खुद को आईएएस और प्रशासनिक अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाली विप्रा शर्मा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बारादरी थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके साथ ही अब विप्रा शर्मा पर दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है, जिनमें से 19 मुकदमे अकेले बारादरी थाने में दर्ज हैं। मामले में गिरफ्तार की जा चुकी तीन महिलाओं के खिलाफ रोज नए खुलासे हो रहे हैं।
ताजा मामला फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र के गांव फरीदापुर रामचरन निवासी रिंकू मौर्य से जुड़ा है। पीड़ित का आरोप है कि विप्रा शर्मा ने खुद को एडीएम बताकर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। नौकरी लगवाने के नाम पर उससे तीन लाख रुपये मांगे गए। रिंकू ने भरोसा करके एक लाख रुपये दे दिए, जबकि बाकी रकम नौकरी लगने के बाद देने की बात हुई थी।
कुछ समय बाद रिंकू को पता चला कि विप्रा शर्मा कोई सरकारी अधिकारी नहीं, बल्कि फर्जी पहचान बनाकर लोगों से ठगी करने वाली महिला है। इसके बाद उसने बारादरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि विप्रा शर्मा अपनी दो बहनों के साथ मिलकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देती थी। आरोपी महिलाएं लग्जरी कारों में ड्राइवर और गनर के साथ चलती थीं, जिससे लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाते थे।
इस गिरोह का भंडाफोड़ पहली शिकायत दर्ज होने के बाद हुआ था। पुलिस ने 28 अप्रैल को विप्रा शर्मा और उसकी दोनों बहनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब लगातार नए पीड़ित सामने आ रहे हैं। पुलिस आरोपियों के नेटवर्क और ठगी से जुड़े अन्य मामलों की भी गहराई से जांच कर रही है।
बारादरी इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह ने बताया कि विप्रा शर्मा और उसके गिरोह के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों को नौकरी और सरकारी पहुंच का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया है।




