बरेली। जनसंख्या को लेकर दिए गए एक बयान ने बरेली में नई बहस छेड़ दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा तीन बच्चे पैदा करने की अपील के बाद शहर में सियासी और धार्मिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ऑल इंडिया जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहाबुद्दीन रजवी ने इस बयान का विरोध करते हुए इसे धर्म से जोड़कर देखने पर आपत्ति जताई है।
मौलाना ने कहा कि देश में जनसंख्या का विषय सभी समुदायों से जुड़ा है और इसे किसी एक धर्म तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब परिवार बड़ा होता है तो खर्च और जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। ऐसे में लोगों को आर्थिक हालात को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग तीन बच्चों की बात करते हैं तो कुछ ज्यादा बच्चों की संख्या बताकर दूसरे धर्मों पर आरोप लगाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि आज हर समाज महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए परिवार नियोजन अपना रहा है।
मौलाना के अनुसार शिक्षा, रोजगार, शादी-ब्याह और बच्चों की परवरिश पर बढ़ते खर्च के कारण मुस्लिम समाज भी दो से ज्यादा बच्चों के पक्ष में नहीं है। हर माता-पिता चाहते हैं कि वे अपने बच्चों को बेहतर तालीम और सुरक्षित भविष्य दे सकें।
घर वापसी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का धर्म दबाव या लालच देकर बदला जाता है तो वह कानून के खिलाफ है। संविधान सभी नागरिकों को अपनी आस्था चुनने की स्वतंत्रता देता है और किसी को जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
बरेली में इस बयान को लेकर चर्चा तेज है और आने वाले समय में जनसंख्या और धर्मांतरण जैसे विषयों पर बहस और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।



