नोएडा। थायरॉयड में ट्यूमर की समस्या से जूझ रहे 14 वर्षीय आदर्श के इलाज में आधुनिक रोबोटिक सर्जरी तकनीक कारगर साबित हुई। महाराष्ट्र के पुणे के पास ग्रामीण इलाके से आए आदर्श का मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर, वैशाली में सफल ऑपरेशन किया गया। खास बात यह रही कि सर्जरी के दौरान गर्दन पर पारंपरिक चीरा लगाने के बजाय बगल के रास्ते से थायरॉयड तक पहुंच बनाई गई।

कम उम्र के आदर्श और उसके परिवार की सबसे बड़ी चिंता सर्जरी के बाद गर्दन पर स्थायी निशान को लेकर थी। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए मैक्स वैशाली की वरिष्ठ सर्जिकल एवं रोबोटिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. सीमा सिंह के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने रोबोटिक ट्रांसएक्सिलरी तकनीक से ऑपरेशन किया।
इस तकनीक में बगल के हिस्से से सर्जिकल उपकरणों को अंदर ले जाकर थायरॉयड क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाती है। इसके बाद ट्यूमर को सावधानीपूर्वक निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य बीमारी का उपचार करने के साथ गर्दन पर दिखाई देने वाले सर्जिकल निशान से बचना भी है।
सर्जरी के बाद आदर्श की हालत स्थिर रही और उसकी रिकवरी भी संतोषजनक बताई गई। परिवार के लिए यह उपचार बीमारी से राहत के साथ-साथ बच्चे के आत्मविश्वास और भविष्य को लेकर भी राहत देने वाला रहा।
डॉ. सीमा सिंह ने बताया कि बच्चों और कम उम्र के मरीजों के इलाज में बीमारी को नियंत्रित करने के साथ उनके भविष्य और जीवन की गुणवत्ता का ध्यान रखना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, उचित रूप से चयनित मरीजों में रोबोटिक सर्जरी बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम देने में मदद कर सकती है।
आदर्श का यह मामला थायरॉयड ट्यूमर के उपचार में रोबोटिक तकनीक के संभावित इस्तेमाल और ऐसे मरीजों में गर्दन पर दिखाई देने वाले निशान को कम करने की आधुनिक चिकित्सा पद्धति को सामने लाता है।




