शुभ और शुक्ल योग के संयोग में मनेगी ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा

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ज्योतिषाचार्य- आचार्य मुकेश मिश्रा

बरेली।ज्येष्ठ ‌ मास की पूर्णिमा इस बार 24 जून गुरुवार को पड़ रही है। हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। आमतौर पर इस दिन से श्रद्धालु गंगा जल लेकर अमरनाथ यात्रा के लिये निकलते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह हिन्दू वर्ष का तीसरा महीना होता है। इस पूर्णिमा पर दान पुण्य स्नान तक खासा महत्व माना जाता है। इस बार पूर्णिमा का मान सूर्योदय से पूर्व ही लग जाएगा यानी की पूर्णिमा का मान दिन और रात व्याप्त रहेगा। इस दिन वट पूर्णिमा व्रत एवं कबीर जयंती का पर्व भी मनाया जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में होता है, जिसका प्रभाव सीधे व्यक्ति के मन और शरीर पर पड़ता है। क्योंकि ज्योतिष में चंद्रमा को द्रव्य और मन का कारक कहा गया है। इस बार पूर्णिमा का महत्व इसलिए ज्यादा है, क्योंकि 27 योगों में सबसे ज्यादा सकारात्मक फल देने वाले शुभ और शुक्ल योग दोनों ही विद्यमान रहेंगे, जो बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा के कारक माने जाते हैं।

शुभ और शुक्ल योग के संयोग में मनेगी ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा

पूर्णिमा के दिन बन रहा शुभ संयोग

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन खास संयोग बन रहा है। ज्येष्ठ पूर्णिमा इस साल गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार और पूर्णिमा तिथि दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित होते हैं। ऐसे में ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व और बढ़ रहा है। पूर्णिमा के दिन ग्रहों की स्थिति की बात करें तो सूर्य मिथुन और चंद्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है और कुंडली में चंद्रमा की शुभता में वृद्धि होती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। सुबह स्नान आदि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें। इस साल कोरोनावायरस से बचाव के लिए घर में रहना ही बेहतर है। आप नहाने के जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इस दिन विधि- विधान से हनुमान जी की पूजा करें। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। रात के वक्त चंद्रमा की पूजा का भी विधान है।

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Author: cradmin

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