बरेली। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने बरेली में प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सिविल लाइंस स्थित इंडियन बैंक के बाहर बैंककर्मियों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में महिला कर्मचारियों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।

बैंककर्मियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने, पीएलआई से जुड़ी विसंगतियां दूर करने और द्विपक्षीय समझौतों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा पेंशन अपडेशन, पुरानी पेंशन की बहाली, हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी में कमी और बैंकों में पर्याप्त स्टाफ की भर्ती जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।
कार्यक्रम का संचालन यूनाइटेड फोरम के जिला संयोजक नवींद्र कुमार ने किया, जबकि अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पी.के. माहेश्वरी ने की। नवींद्र कुमार ने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह को लेकर बनी सहमति को लागू नहीं किया गया है। उनके मुताबिक सरकार, इंडियन बैंक एसोसिएशन और यूनाइटेड फोरम के बीच बातचीत के कई दौर होने के बावजूद मांगों पर ठोस सहमति नहीं बन सकी।
उन्होंने दावा किया कि देशभर में करीब आठ लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल और इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया जा सकता है।
पी.के. माहेश्वरी ने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को कर्मचारियों के साथ सकारात्मक बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। उपाध्यक्ष ओपी बढ़ेरा और संतोष तिवारी ने भी आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही।
महिला प्रकोष्ठ की रश्मि शर्मा ने कहा कि विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। इंडियन बैंक अधिकारी संघ के लीडर अश्विन आर्य ने कहा कि कर्मचारी अपने अधिकारों की मांग से पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन को BTUF और पेंशनर यूनियन समेत अन्य संगठनों का भी समर्थन मिला।
सभा में पुनीत टंडन, कॉम जगन्नाथ, सुनीत भटनागर, बीडी सिंह, संजीव अग्रवाल, आशीष शुक्ला, चरण सिंह यादव, विकास कुमार, शैलेंद्र कश्यप, भूपेंद्र कुमार, मुनीश बाबू, अरुण कुमार, अमित कुमार, महेंद्र यादव, प्रवीण राठौर, अनुज शुक्ला, पूजा जोशी और पूजा कौशल समेत कई बैंककर्मी मौजूद रहे।




