बरेली। मेहनत, लगन और मजबूत इरादों के सामने आर्थिक अभाव भी हार मान जाते हैं। इसका ताजा उदाहरण बरेली के बिथरी चैनपुर क्षेत्र के ग्राम कचौली के रहने वाले किसान पुत्र प्रियांशु पटेल

प्रियांशु एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता होतम सिंह खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी माता चीनू पटेल गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। बेहतर तैयारी के लिए प्रियांशु ने राजस्थान के कोटा में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी की।
कड़ी मेहनत का परिणाम उन्हें तब मिला, जब NEET-UG 2026 के परिणाम घोषित हुए। प्रियांशु ने 720 में से 616 अंक प्राप्त कर देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के बीच ऑल इंडिया रैंक 5856 हासिल की। इस सफलता के साथ वह अपने गांव कचौली के पहले ऐसे छात्र बन गए हैं, जिन्होंने नीट परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
प्रियांशु बताते हैं कि उनके गांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। गंभीर बीमारी होने पर लोगों को इलाज के लिए शहरों की ओर जाना पड़ता है। ग्रामीणों की इसी परेशानी ने उनके भीतर डॉक्टर बनने का सपना जगाया। उनका उद्देश्य केवल मेडिकल की पढ़ाई करना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में लौटकर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि गांव के लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों तो समय पर इलाज मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
प्रियांशु ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के निरंतर सहयोग को दिया। उनकी बड़ी बहन सुरभि पटेल, जो उच्च शिक्षा की तैयारी कर रही हैं, ने भी हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया।
प्रियांशु की उपलब्धि के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। लोगों का कहना है कि एक किसान के बेटे की यह सफलता गांव के अन्य बच्चों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देगी।



