बरेली। फरीदपुर थाना क्षेत्र के खैरुआ गांव में जमीन विवाद के बीच पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से बिना किसी वैधानिक आदेश के दीवार गिराए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। मामले की जांच के बाद पुलिस विभाग ने माना कि मौके पर मौजूद उपनिरीक्षक और आरक्षी ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसके बाद दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई है।

क्षेत्राधिकारी (सीओ) फरीदपुर संदीप सिंह ने बताया कि गांव निवासी रजनीश और उनके सगे भाई आरेंद्र के बीच करीब सात बीघा कृषि भूमि के बंटवारे और निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। 24 जुलाई को विवाद बढ़ने पर डायल-112 पर सूचना दी गई थी। पुलिस दोनों पक्षों को थाने लेकर आई और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से 170 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की गई।
हालांकि, 26 जुलाई को दोनों पक्ष फिर निर्माण कार्य को लेकर आमने-सामने आ गए। दूसरी बार भी डायल-112 की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को थाने लाकर 170 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की गई।जांच में सामने आया कि मौके पर पहुंचे उपनिरीक्षक प्रवेंद्र कुमार और आरक्षी श्रीकांत ने किसी न्यायालय, सक्षम प्राधिकारी या वैधानिक आदेश के बिना ही विवादित दीवार को क्षतिग्रस्त कर दिया। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों की कार्रवाई स्पष्ट रूप से दिखाई देने के बाद पूरे मामले का संज्ञान लिया गया।
सीओ संदीप सिंह ने बताया कि जांच में पुलिसकर्मियों की प्रक्रिया संबंधी लापरवाही सामने आई है। इसी आधार पर दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि कोई पुलिसकर्मी भी नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।



