बरेली।
नाटक “कहानी” की कहानी एक ऐसे लेखक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी रचनाओं को वास्तविकता में जीवंत देखने की इच्छा रखता है। लेकिन जैसे ही उसके रचे हुए पात्र उसके सामने आते हैं, वे उससे सवाल करने लगते हैं कि उन्हें इस तरह क्यों गढ़ा गया कि उनके जीवन में अन्याय और पीड़ा छा गई। यह द्वंद्व लेखक और पात्रों के बीच गहरी बहस को जन्म देता है। पात्र अपने दर्द और संवेदनाओं को लेखक के सामने रखते हैं और उसे उसकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हैं।
कहानी का चरम उस समय आता है जब लेखक अपने ही पात्रों के साथ न्याय करने के लिए खुद का वजूद कुर्बान कर देता है। इस भावनात्मक मोड़ ने दर्शकों को गहराई तक छू लिया और उन्हें साहित्य और जीवन के रिश्ते पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
इस प्रभावशाली प्रस्तुति को लेखक व निर्देशक शादान खान ने संवेदनशीलता और रचनात्मकता के साथ तैयार किया। उनके निर्देशन ने हर दृश्य को जीवंत और असरदार बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसे रंगालय थियेटर के संयोजक अनिल अग्रवाल और डॉ. विनोद पागरानी ने संपन्न कराया। महोत्सव के तहत गुरुवार को भी युथ थिएटर शाहजहांपुर का नाटक “आखिरी रंग” मंचित किया जाएगा, जो इस सांस्कृतिक उत्सव का समापन करेगा।
