इनपुट पवन त्रिपाठी
बरेली। रिश्ते सिर्फ खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि अपनेपन की भावना से भी बनते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा बरेली में देखने को मिला, जब रोडवेज के ड्राइवर ने एक साल पहले बनी अपनी ‘यात्रा वाली बहन’ को फोन कर कहा— “बहन, क्या राखी नहीं बांधोगी?”
विद्युत विभाग में कार्यरत ज्योति श्रीवास्तव पत्नी सुमित श्रीवास्तव की यह कहानी पिछले साल रक्षाबंधन के दिन शुरू हुई थी। जब वह रोडवेज बस से सफर कर रही थीं, तभी ड्राइवर के साथ भाई-बहन का रिश्ता बन गया। ड्राइवर भाई ने बहन का नंबर ले लिया और पूरे साल उस रिश्ते को संजोकर रखा।
इस बार रक्षाबंधन पर जैसे ही ड्राइवर अमर सिंह निवासी रामपुर, बरेली में बस लेकर पहुंचे, उन्होंने बहन को याद करते हुए फोन किया। ज्योति तुरंत रोडवेज बस स्टेशन पहुंचीं और ड्यूटी पर खड़े अपने भाई की कलाई पर सड़क पर ही राखी बांध दी। इस भावुक दृश्य ने वहां मौजूद सभी लोगों के दिल छू लिए।
ज्योति ने कहा “राखी का बंधन सिर्फ जन्म से नहीं, बल्कि दिल से जुड़ता है। इसमें सुरक्षा, ममता और विश्वास की खुशबू होती है।” यह दृश्य एक बार फिर साबित करता है कि रिश्तों को मजबूत करने के लिए बस अपनेपन की भावना जरूरी है।




